
तेहरान।
ईरान में पिछले दो हफ्तों से जारी विरोध प्रदर्शन अब खुली बगावत में बदलते नजर आ रहे हैं। महंगाई और गिरती मुद्रा के खिलाफ शुरू हुआ जनआंदोलन अब सीधे इस्लामिक शासन और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ खड़ा हो गया है। गुरुवार आधी रात के बाद हालात अचानक बेकाबू हो गए और कई शहरों में हिंसा भड़क उठी।
तेहरान, इस्फहान और अन्य बड़े शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। “खामेनेई मुर्दाबाद” और “तानाशाही खत्म करो” जैसे नारे गूंजने लगे। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया। इस्फहान में सरकारी टेलीविजन के दफ्तर में आग लगा दी गई, जबकि तेहरान की अल-रसूल मस्जिद में आगजनी की भी खबर सामने आई है। कई स्थानों पर मूर्तियां गिराने और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं दर्ज की गई हैं।
ट्रंप की खुली धमकी
ईरान में बढ़ती हिंसा के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान के शासकों को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करती है, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा।
उन्होंने कहा, “अगर वे लोगों को मारना शुरू करते हैं, तो हम दखल देंगे। हम वहां वार करेंगे, जहां उन्हें सबसे ज्यादा दर्द होगा।”
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि हालात बिगड़ने पर वह सैन्य कार्रवाई का आदेश दे सकते हैं।
खामेनेई का जवाब
देशभर में उथल-पुथल के बीच शुक्रवार को सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई टेलीविजन पर सामने आए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे विदेशी ताकतों, खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति को खुश करने के लिए अपने ही देश की सड़कों को आग के हवाले कर रहे हैं।
सरकारी टीवी चैनलों पर इसके बाद शासन समर्थक रैलियों का प्रसारण किया गया, जिनमें लोग “अमेरिका मुर्दाबाद” के नारे लगाते दिखे।
इंटरनेट बंद, संपर्क ठप
हिंसक प्रदर्शनों के चलते ईरान सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं। टेलीफोन कॉल भी बाधित कर दी गई हैं, जिससे आम लोगों के लिए संपर्क करना बेहद मुश्किल हो गया है।
अब तक 42 लोगों की मौत
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, 28 दिसंबर को आंदोलन शुरू होने के बाद से अब तक 42 लोगों की मौत हो चुकी है। कई समूहों ने ईरानी सुरक्षाबलों पर प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के आरोप लगाए हैं। हालांकि सरकार की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया है।
संकट के मुहाने पर ईरान
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान इस समय गंभीर राजनीतिक और आर्थिक संकट से गुजर रहा है। जिस आंदोलन की शुरुआत महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ हुई थी, वह अब सीधे सत्ता परिवर्तन की मांग में तब्दील हो चुका है। अंतरराष्ट्रीय दबाव, अमेरिकी चेतावनियां और आंतरिक असंतोष मिलकर ईरान को एक निर्णायक मोड़ पर ले आए हैं।