Saturday, January 10

किसी को बेटी तो किसी को पति ने दी अभिनय की प्रेरणा भारतेंदु नाट्य अकादमी में देशभर से आए प्रतिभागी सीख रहे अभिनय के गुर

 

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लखनऊ। राजधानी स्थित भारतेंदु नाट्य अकादमी में इस वर्ष ग्रीष्मकालीन कार्यशालाओं की तर्ज पर शीतकालीन बाल एवं युवा नाट्य कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। 29 दिसंबर से प्रारंभ हुई यह कार्यशाला 25 जनवरी तक चलेगी। खास बात यह है कि इस बार इसमें सिर्फ लखनऊ ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागी भी हिस्सा ले रहे हैं।

 

युवा नाट्य कार्यशाला के निर्देशक प्रिवेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार सहित कई राज्यों से प्रतिभागी यहां अभिनय सीखने पहुंचे हैं। कोई अपने व्यक्तित्व को निखारने आया है तो कोई मंच का डर दूर करना चाहता है। कई महिलाएं अपने अधूरे सपनों को पूरा करने का प्रयास कर रही हैं, जबकि कुछ प्रतिभागी पढ़ाई और जीवन के तनाव से राहत पाने के लिए नाटक का सहारा ले रहे हैं। हर प्रतिभागी की अपनी अलग और प्रेरणादायक कहानी है।

 

अकादमी के निदेशक बिपिन कुमार ने बताया कि पहले शीतकालीन कार्यशाला के लिए अपेक्षित आवेदन नहीं मिलने के कारण योजना स्थगित करनी पड़ी थी, लेकिन इस बार युवाओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। युवा कार्यशाला के लिए 70 से अधिक आवेदन आए, जिनमें से 62 प्रतिभागियों का चयन किया गया। एक साथ इतने प्रतिभागियों को देखते हुए 31-31 प्रतिभागियों के दो बैच बनाए गए हैं।

 

पहले बैच में निर्देशक प्रिवेंद्र कुमार सिंह द्वारा ‘गैजेट’ नाटक तैयार कराया जा रहा है, जबकि दूसरे बैच में प्रसिद्ध रंगकर्मी रोजी मिश्रा ‘अभिज्ञान शकुंतलम’ का मंचन करवा रही हैं। वहीं, बाल नाट्य कार्यशाला में दिल्ली से आए रंगकर्मी मनीष सैनी 31 बच्चों को ‘जतन से रतन’ नाटक सिखा रहे हैं।

 

बेटी ने दी सपनों को उड़ान

 

42 वर्षीय सुमन थापा बताती हैं कि उनका बचपन से थिएटर करने का सपना था, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के कारण वह इसे पूरा नहीं कर सकीं। शादी के बाद भी उन्हें मंच से दूर रहना पड़ा। वह अपनी भावनाएं डायरी में लिखती रहीं। एक दिन उनकी बेटी आकांक्षा ने वह डायरी पढ़ी और मां को फिर से अभिनय की ओर लौटने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद सुमन ने ग्रीष्मकालीन कार्यशाला में भाग लिया और ‘चंदा बेड़िनी’ नौटंकी में काकी का किरदार निभाया। अब वह दोबारा सीखने आई हैं और अपनी अलग पहचान बनाना चाहती हैं।

 

पति ने दिया आगे बढ़ने का हौसला

 

32 वर्षीय विजय लक्ष्मी पहली बार नाट्य कार्यशाला में शामिल हुई हैं। उन्होंने बताया कि कम उम्र में शादी हो जाने के कारण वह कभी अपनी इच्छा जाहिर नहीं कर पाईं। बेटी के बाल नाट्य कार्यशाला में भाग लेने के बाद उन्होंने अपने मन की बात पति से कही। पति के सहयोग और प्रोत्साहन से वह आज अभिनय सीख रही हैं।

 

पूरा परिवार सीख रहा नाटक

 

युवा कार्यशाला में बेसिक शिक्षक बृजेश कुमार अपने पूरे परिवार के साथ शामिल हैं। उनकी आर्किटेक्ट पत्नी दीपिका, यूकेजी में पढ़ने वाली बेटी कियारा, मैकेनिकल इंजीनियर बहन शाइजा और लॉ की छात्रा बहन नीलम भी नाटक सीख रही हैं। बृजेश का कहना है कि नाटक से आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यक्तित्व में निखार आता है, इसलिए पूरा परिवार साथ में यह अनुभव ले रहा है।

 

अस्सी घाट से रंगमंच तक

 

वाराणसी के सम्पूर्णानंद विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले अंकित मिश्रा अस्सी घाट पर गंगा आरती करते हैं। उन्हें नाटक का शौक था और कार्यशाला की जानकारी मिलने पर वह इसे सीखने के लिए लखनऊ पहुंचे।

 

यूजी कोर्स की मांग

 

इंटरमीडिएट की छात्रा कौस्तुभी शर्मा पहले ग्रीष्मकालीन कार्यशाला में ‘चंदा बेड़िनी’ का मुख्य किरदार निभा चुकी हैं। इस बार वह निर्देशन और मंच के पीछे की बारीकियां सीखने आई हैं। उनका कहना है कि अकादमी में स्नातक स्तर के पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाने चाहिए।

 

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