Friday, June 19

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तूफान के बाद शांति या नई सुनामी? आज अमेरिका में होगा बड़ा फैसला, पूरी दुनिया की नजरें टिकीं

नई दिल्ली। घरेलू शेयर बाजार पिछले पांच कारोबारी सत्रों से लगातार दबाव में है। इस अवधि में सेंसेक्स करीब 2,200 अंक टूट चुका है, जबकि निफ्टी में 2.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। अब निवेशकों की निगाहें अमेरिका पर टिकी हैं, जहां आज सुप्रीम कोर्ट एक बेहद अहम फैसला सुनाने वाला है। इस फैसले का असर न केवल अमेरिकी अर्थव्यवस्था, बल्कि भारतीय शेयर बाजार समेत वैश्विक बाजारों पर भी पड़ सकता है।

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दरअसल, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है। आज आने वाला फैसला यह तय करेगा कि ये टैरिफ पूरी तरह रद्द होंगे या आंशिक रूप से लागू रहेंगे। इसी अनिश्चितता के कारण वैश्विक बाजारों में बेचैनी बनी हुई है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि सुप्रीम कोर्ट ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को अवैध घोषित करता है, तो भारतीय बाजारों में तेज राहत की रैली देखने को मिल सकती है। भारत पर ट्रंप प्रशासन ने करीब 50 प्रतिशत का टैरिफ लगाया था, जिससे भारतीय निर्यात पर गहरा असर पड़ा। ऐसे में टैरिफ हटने से भारत को बड़ा लाभ मिल सकता है।

हालांकि, बाजार के लिए एक और खतरा भी सामने है। हाल ही में ट्रंप द्वारा मंजूर किए गए एक प्रस्ताव के तहत रूस से तेल आयात करने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए जाने की संभावना है। यह प्रस्ताव अगले सप्ताह अमेरिकी संसद में पेश किया जा सकता है। अगर इसे मंजूरी मिलती है, तो यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार संतुलन के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।

फैसले की बारीकियों पर नजर

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी. के. विजयकुमार के अनुसार, बाजार सिर्फ फैसले का नहीं, बल्कि उसकी बारीकियों का इंतजार कर रहा है। उन्होंने कहा,
“हालिया गिरावट की बड़ी वजह यह आशंका थी कि रूस से जुड़े प्रतिबंध कानून के तहत भारत पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर है।”

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कोर्ट टैरिफ को पूरी तरह रद्द करता है, तो बाजार में जोरदार तेजी आ सकती है। वहीं, अगर टैरिफ को बरकरार रखा गया, तो बाजार में अस्थिरता और अनिश्चितता बनी रह सकती है।

आगे क्या?

टैरिफ जारी रहने की स्थिति में सप्लाई चेन की लागत बढ़ी रहेगी, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है और निवेश फैसले टल सकते हैं। ऐसी हालत में बाजार सीमित दायरे में रह सकता है और केवल चुनिंदा शेयरों में ही हलचल देखने को मिलेगी।

कुल मिलाकर, आज अमेरिका में आने वाला फैसला यह तय करेगा कि भारतीय बाजारों में राहत की शांति आएगी या अस्थिरता की नई लहर उठेगी

 

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