
राजस्थान की सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों के निवाले से जुड़े मिड-डे मील योजना में सामने आए 2000 करोड़ रुपये से अधिक के कथित घोटाले ने राज्य की राजनीति में भारी हलचल मचा दी है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने इस बहुचर्चित मामले में भाजपा नेता एवं पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह यादव के दोनों बेटों सहित 21 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि घोटाले की परतें अभी और खुल सकती हैं।
कौन हैं राजेंद्र सिंह यादव?
66 वर्षीय राजेंद्र सिंह यादव मूल रूप से उत्तराखंड के नैनीताल जिले के किच्छा गांव के निवासी हैं। उन्होंने प्रारंभिक से लेकर उच्च शिक्षा तक की पढ़ाई नैनीताल से ही की। व्यवसायिक परिवार से ताल्लुक रखने वाले यादव करीब 20 वर्ष पहले जयपुर के पास कोटपूतली में आकर बसे और यहीं से उन्होंने राजनीति में कदम रखा।
राजनीतिक सफर: हार से सत्ता तक
राजेंद्र सिंह यादव ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की।
2008 विधानसभा चुनाव में कोटपूतली से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा, लेकिन मात्र 893 वोटों से हार गए।
2013 में शानदार वापसी करते हुए 24,687 मतों से जीत दर्ज की।
2018 में दोबारा विधायक बने, 13,876 मतों के अंतर से जीत हासिल की।
2023 विधानसभा चुनाव में बेहद करीबी मुकाबले में उन्हें 321 मतों से हार का सामना करना पड़ा।
गहलोत सरकार में मंत्री रहे
लगातार दूसरी बार विधायक बनने के बाद राजेंद्र सिंह यादव को तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का करीबी माना जाता था। उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करते हुए पहले मोटर गैराज, भाषा, आपदा प्रबंधन एवं राहत मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार दिया गया। बाद में वे उच्च शिक्षा मंत्री और गृह राज्य मंत्री भी रहे। इसके अलावा वे बांसवाड़ा, डूंगरपुर और नागौर के प्रभारी मंत्री भी रह चुके हैं।
पहले भी घिर चुके हैं विवादों में
करीब तीन साल पहले मिड-डे मील योजना से जुड़ी गड़बड़ियों को लेकर आयकर विभाग ने राजेंद्र यादव के कोटपूतली, जयपुर और उत्तराखंड सहित एक दर्जन से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की थी।
उस दौरान:
2.90 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए
110 करोड़ रुपये की अघोषित आय सामने आई
बाद में उनके बेटों द्वारा करीब 17 करोड़ रुपये सरेंडर किए गए
कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल
लोकसभा चुनाव 2024 से पहले राजेंद्र सिंह यादव ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। मार्च 2024 में उनके भाजपा में शामिल होने को लेकर राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा रही कि वे केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई से बचने के लिए पार्टी बदल रहे हैं। हालांकि, भाजपा में शामिल होने के बावजूद उन्हें इस मामले में कोई राहत नहीं मिली।
अब बेटों पर दर्ज हुआ केस
ताज़ा कार्रवाई में ACB ने राजेंद्र सिंह यादव के दोनों बेटों—मधुर यादव और त्रिभुवन यादव—पर कॉनफैड अधिकारियों से मिलीभगत कर करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगाया है। एजेंसी के अनुसार, जांच के आधार पर गिरफ्तारी की कार्रवाई भी जल्द हो सकती है।
राजनीतिक असर गहराने के आसार
सरकारी स्कूलों के बच्चों के भोजन से जुड़े इस घोटाले ने न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि भाजपा और कांग्रेस—दोनों दलों की साख पर भी गंभीर प्रभाव डाला है। आने वाले दिनों में यह मामला राजस्थान की राजनीति में और बड़े सियासी तूफान का रूप ले सकता है।