
पाकिस्तान की टेलीकॉम अथॉरिटी (PTA) ने हाल ही में 10 करोड़ मोबाइल फोन ब्लॉक करने का बड़ा कदम उठाया है। इनमें 7.2 करोड़ फोन नकली और 2.7 करोड़ फोन क्लोन या डुप्लीकेट IMEI वाले थे। इसके अलावा, 8.68 लाख हैंडसेट चोरी या खोए हुए पाए गए। इस कार्रवाई का उद्देश्य ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और स्थानीय मोबाइल निर्माण को बढ़ावा देना बताया गया है।
DIRBS सिस्टम से मिली सफलता
PTA ने इस कार्रवाई के लिए डिवाइस आइडेंटिफिकेशन रजिस्ट्रेशन एंड ब्लॉकिंग सिस्टम (DIRBS) का उपयोग किया। यह सिस्टम मोबाइल डिवाइस मैनेजमेंट (MDM) नियम, 2021 के तहत लागू किया गया था। DIRBS के माध्यम से पाकिस्तान में केवल सत्यापित और नियमों का पालन करने वाले मोबाइल नेटवर्क पर काम कर पाएंगे। इससे देश में मोबाइल स्मगलिंग और अनधिकृत डिवाइस के उपयोग को काफी हद तक रोका जा सका है।
स्थानीय मोबाइल उत्पादन में बढ़ोतरी
इस कदम के प्रभाव से पाकिस्तान में स्थानीय मोबाइल निर्माण को भी तेजी मिली। 2025 तक लगभग 95% मोबाइल डिवाइस वहीं बने, जिनमें 68% स्मार्टफोन शामिल हैं। देश में कुल 36 कंपनियों को निर्माण की अनुमति मिली है, जिनमें सैमसंग, शाओमी, ओप्पो और वीवो जैसी बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं।
सरकारी रेवेन्यू में वृद्धि
पर्सनल मोबाइल डिवाइस रजिस्ट्रेशन से पाकिस्तान सरकार को 2019 से अब तक 83 अरब रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कदम ग्राहकों को नकली और नुकसान पहुंचाने वाले डिवाइसों से सुरक्षा देने के साथ-साथ स्थानीय उत्पादन और तकनीकी निवेश को भी प्रोत्साहित करते हैं।
भारत में भी उठाना चाहिए सख्त कदम
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को भी ऐसे कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है। हाल ही में दिल्ली के करोल बाग में सैमसंग के नकली प्रीमियम स्मार्टफोन बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ, जो ग्राहकों की प्राइवेसी और सुरक्षा के लिए खतरा था। ऐसे मामलों से बचने के लिए भारत में भी DIRBS जैसे सिस्टम को लागू करने की सलाह दी जा रही है।