Friday, January 9

मेरठ (उत्तर प्रदेश): मेरठ के कपसाड़ गांव में 45 वर्षीय महिला सुनीता की हत्या और उनकी 20 वर्षीय बेटी रूबी के अपहरण के बाद गांव में तनाव का माहौल है। घटना के बाद पुलिस की 10 टीमें आरोपियों की धरपकड़ में जुटी हुई हैं, वहीं राजनीतिक गतिविधियाँ भी तेज हो गई हैं। धरने पर बैठे सपा विधायक अतुल प्रधान: इस मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान ने शुक्रवार को कपसाड़ गांव जाने का प्रयास किया, लेकिन भारी पुलिस बल ने उन्हें बैरीकेड लगाकर रोक लिया। इससे नाराज होकर अतुल प्रधान वहीं धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि वह पीड़ित परिवार को सांत्वना देने के लिए गांव में जाना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। विधायक ने पुलिसकर्मियों से उच्च अधिकारियों को बुलाने की मांग की और कहा, “गांव में गुंडागिरी चल रही है और हमें यहां घुसने से रोका जा रहा है। एक बेटी का अपहरण हुआ है और उसकी मां की हत्या कर दी गई है।” भीम आर्मी का ऐलान: इस बीच, भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने भी कपसाड़ गांव आने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि वह पीड़ित परिवार को न्याय दिलवाकर रहेंगे। गांव के प्रवेश मार्ग पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और बाहरी लोगों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सपा नेताओं के हंगामे के बाद गांव का माहौल और भी गर्म हो गया है। घटना का विवरण: गुरुवार सुबह आठ बजे सुनीता अपनी बेटी के साथ खेत में गन्ने की सिंचाई के लिए जा रही थी। आरोप है कि रास्ते में गांव के ही कुछ राजपूत समाज के युवकों ने उन्हें जबरन रोक लिया। महिला और उसकी बेटी के साथ अभद्रता की और विरोध करने पर महिला के सिर पर धारदार हथियार से कई वार कर दिए। महिला बेहोश हो गई और आरोपी उसे छोड़कर उसकी बेटी रूबी को जबरन उठाकर ले गए। घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीण और परिजन मौके पर पहुंचे और घायल महिला को इलाज के लिए मोदीपुरम अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई। अंतिम संस्कार की देरी: पीड़ित परिवार ने अब तक महिला का अंतिम संस्कार नहीं किया है और मामले में न्याय की मांग कर रहे हैं। पुलिस की कार्रवाई और राजनीतिक दबाव के बीच कपसाड़ गांव में माहौल और भी तनावपूर्ण होता जा रहा है।

 

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मेरठ (उत्तर प्रदेश): मेरठ के कपसाड़ गांव में 45 वर्षीय महिला सुनीता की हत्‍या और उनकी 20 वर्षीय बेटी रूबी के अपहरण के बाद गांव में तनाव का माहौल है। घटना के बाद पुलिस की 10 टीमें आरोपियों की धरपकड़ में जुटी हुई हैं, वहीं राजनीतिक गतिविधियाँ भी तेज हो गई हैं।

 

धरने पर बैठे सपा विधायक अतुल प्रधान:

 

इस मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान ने शुक्रवार को कपसाड़ गांव जाने का प्रयास किया, लेकिन भारी पुलिस बल ने उन्हें बैरीकेड लगाकर रोक लिया। इससे नाराज होकर अतुल प्रधान वहीं धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि वह पीड़ित परिवार को सांत्वना देने के लिए गांव में जाना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। विधायक ने पुलिसकर्मियों से उच्च अधिकारियों को बुलाने की मांग की और कहा, “गांव में गुंडागिरी चल रही है और हमें यहां घुसने से रोका जा रहा है। एक बेटी का अपहरण हुआ है और उसकी मां की हत्या कर दी गई है।”

 

भीम आर्मी का ऐलान:

 

इस बीच, भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने भी कपसाड़ गांव आने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि वह पीड़ित परिवार को न्याय दिलवाकर रहेंगे। गांव के प्रवेश मार्ग पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और बाहरी लोगों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सपा नेताओं के हंगामे के बाद गांव का माहौल और भी गर्म हो गया है।

 

घटना का विवरण:

 

गुरुवार सुबह आठ बजे सुनीता अपनी बेटी के साथ खेत में गन्ने की सिंचाई के लिए जा रही थी। आरोप है कि रास्ते में गांव के ही कुछ राजपूत समाज के युवकों ने उन्हें जबरन रोक लिया। महिला और उसकी बेटी के साथ अभद्रता की और विरोध करने पर महिला के सिर पर धारदार हथियार से कई वार कर दिए। महिला बेहोश हो गई और आरोपी उसे छोड़कर उसकी बेटी रूबी को जबरन उठाकर ले गए।

 

घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीण और परिजन मौके पर पहुंचे और घायल महिला को इलाज के लिए मोदीपुरम अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई।

 

अंतिम संस्कार की देरी:

 

पीड़ित परिवार ने अब तक महिला का अंतिम संस्कार नहीं किया है और मामले में न्याय की मांग कर रहे हैं। पुलिस की कार्रवाई और राजनीतिक दबाव के बीच कपसाड़ गांव में माहौल और भी तनावपूर्ण होता जा रहा है।

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