
पटना/नई दिल्ली: बिहार के चर्चित नौकरी के बदले जमीन घोटाले (Land For Job Case) में नई दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव समेत 41 आरोपियों पर आरोप तय करते हुए कहा कि इस दौरान लालू परिवार ने एक आपराधिक सिंडिकेट की तरह काम किया। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपियों के बीच व्यापक आपराधिक साजिश के स्पष्ट संकेत हैं, जिससे प्रथम दृष्टया यह मामला साबित होता है। अब इस मामले में ट्रायल की राह साफ हो चुकी है।
कोर्ट की टिप्पणी के मायने:
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कोई साधारण भ्रष्टाचार का मामला नहीं है। नौकरी के बदले जमीन दिलाने की साजिश इस तरह से संगठित थी कि इसे क्राइम सिंडिकेट के तौर पर देखा जा सकता है। इसका मतलब है कि आरोपियों ने लंबे समय तक योजना बनाई और अपने फायदे के लिए काम किया।
क्राइम सिंडिकेट क्या होता है?
क्राइम सिंडिकेट एक संगठित अपराधी समूह होता है। यह किसी परिवार, समुदाय या किसी विशेष ग्रुप के लोगों द्वारा संचालित होता है। इसके सदस्यों के काम करने का तरीका संगठित और योजना बद्ध होता है। इसमें पैसे की आवक-जावक, काम की बंटवारा और संपत्ति का प्रबंधन सभी तय तरीके से किया जाता है।
क्राइम सिंडिकेट कैसे काम करता है?
क्राइम सिंडिकेट के सदस्य अकसर डर और धमकी के जरिए फायदा कमाते हैं। भ्रष्टाचार और गैरकानूनी गतिविधियों का भी सहारा लिया जाता है। यह केवल शॉर्ट टर्म गैंग की तरह नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलने वाली योजना पर आधारित होता है। इसमें बल और दिमाग का सही कॉम्बिनेशन इस्तेमाल किया जाता है ताकि लंबे समय तक लाभ कमाया जा सके।
इस मामले में अब सीबीआई ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होगी और अदालत में लालू परिवार सहित सभी आरोपियों के खिलाफ सबूत पेश किए जाएंगे।