Friday, January 9

अमेरिका–नाटो में ग्रीनलैंड को लेकर बढ़ता तनाव: क्या सहयोगियों के बीच टकराव की आशंका

 

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए आक्रामक बयानों के बाद नाटो (NATO) के भीतर अभूतपूर्व तनाव पैदा हो गया है। डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड पर अमेरिकी दावों और सैन्य विकल्पों की खुली चर्चा ने यूरोपीय सहयोगियों को चिंतित कर दिया है। सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह विवाद नाटो की एकजुटता के लिए सबसे बड़ी परीक्षा बन सकता है—वह भी ऐसे समय में, जब बाहरी खतरों से निपटने के लिए गठबंधन की मजबूती अहम मानी जाती रही है।

 

सहयोगी के खिलाफ धमकी, नाटो की दुविधा

नाटो की रणनीतियां अब तक बाहरी शत्रुओं को ध्यान में रखकर बनी रही हैं। लेकिन अमेरिका जैसे प्रमुख सदस्य द्वारा ही एक अन्य सदस्य देश के क्षेत्र को लेकर धमकी दिए जाने से गठबंधन असहज स्थिति में आ गया है। नाटो महासचिव मार्क रुटे की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि यह रणनीति लंबे समय तक कारगर नहीं मानी जा रही।

 

डेनमार्क की चेतावनी: ‘सब कुछ रुक जाएगा’

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि अमेरिका किसी अन्य नाटो सदस्य पर सैन्य कार्रवाई करता है, तो नाटो सहित द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी सुरक्षा व्यवस्था ही ठप पड़ सकती है। उनके बयान से यह संकेत मिला है कि यूरोप इस मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं है।

 

सोवियत संघ का सपना, आज की हकीकत?

स्टॉकहोम फ्री वर्ल्ड के सीनियर फेलो पैट्रिक ओक्सानन के अनुसार, नाटो के भीतर इस तरह का विभाजन सोवियत नेताओं का पुराना सपना रहा होगा—जो वे कभी साकार नहीं कर पाए। ओक्सानन का कहना है कि मौजूदा हालात रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए रणनीतिक लाभ की तरह हैं।

 

ट्रंप के करीबी बयानों से बढ़ी चिंता

ट्रंप के करीबी सलाहकार स्टीफन मिलर ने डेनमार्क की संप्रभुता पर सवाल उठाते हुए कहा कि ग्रीनलैंड के लिए कोई यूरोपीय देश अमेरिका से नहीं लड़ेगा। वहीं, उनकी पत्नी केटी मिलर की सोशल मीडिया पोस्ट—जिसमें ग्रीनलैंड का नक्शा अमेरिकी झंडे से ढंका दिखाया गया और ‘जल्द’ लिखा था—ने अटकलों को और हवा दी है। व्हाइट हाउस की हालिया टिप्पणी ने भी संकेत दिया कि राष्ट्रपति के पास सैन्य विकल्प खुले रहते हैं।

 

यूरोप का कड़ा रुख

यूरोप में विरोध तेज होता जा रहा है। फ्रांस के सेवानिवृत्त जनरल मिशेल याकोवलेफ ने चेतावनी दी कि यदि ग्रीनलैंड विवाद के चलते नाटो टूटता है, तो यूरोप अमेरिकी सैनिकों को अपने ठिकानों से बाहर निकाल सकता है। उन्होंने कहा कि यूरोप अमेरिका से युद्ध नहीं करेगा, लेकिन अपने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी समाप्त करने का विकल्प खुला रहेगा।

 

निष्कर्ष

ग्रीनलैंड को लेकर बढ़ता विवाद केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रहा, बल्कि नाटो की एकता और वैश्विक सुरक्षा ढांचे के भविष्य पर सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कूटनीति इस तनाव को शांत करती है या सहयोगियों के बीच दरार और गहरी होती है।

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