
ढाका: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या में भारत पर लगाए जा रहे आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह हत्या अंतरिम सरकार के तहत बांग्लादेश में फैली कानून-व्यवस्था की कमी और चुनावी हिंसा का नतीजा थी।
यूनुस पर तंज: शेख हसीना ने कहा कि नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस की नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने हत्या के बाद ठोस कार्रवाई नहीं की। इसका फायदा कट्टरपंथी ताकतों ने उठाया और इसे राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। हसीना ने कहा कि यूनुस सरकार की नाकामियों को छुपाने के लिए हत्या को भारत से जोड़ने की कोशिश की जा रही थी।
भारत पर आरोपों को ठुकराया: पूर्व प्रधानमंत्री ने इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि ढाका में भारत को दोषी ठहराने की कोशिश “जानबूझकर और पूरी तरह बेबुनियाद” थी। उन्होंने इसे “कट्टरपंथी ताकतों द्वारा किया गया प्रयास” करार दिया, जो यूनुस सरकार की विफलताओं को विदेशी साजिशों के रूप में पेश करना चाहती थीं।
हत्याकांड और अशांति: हादी को पिछले महीने ढाका में गोली मारी गई थी और इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया था, लेकिन उनकी मौत हो गई। इसके बाद बांग्लादेश में हिंसक प्रदर्शन और अशांति फैल गई। हादी की हत्या को लेकर भारत पर आरोप मढ़ने से दोनों देशों के संबंध प्रभावित हुए, जिसे नई दिल्ली ने सख्ती से खारिज किया और मामले की पूरी जांच की मांग की।
शेख हसीना का निष्कर्ष: उन्होंने कहा, “इस मामले को भारत से जोड़ने की कोशिशें जानबूझकर की जा रही हैं और ये पूरी तरह बेबुनियाद हैं। ये कट्टरपंथी ताकतों की चाल है, जो बांग्लादेश के सबसे करीबी सहयोगी के खिलाफ दुश्मनी फैलाना चाहती हैं और आंतरिक शासन की विफलताओं को विदेशी साजिशों के रूप में पेश करना चाहती हैं।”