
नई दिल्ली। देश में मोबाइल पर बिना इंटरनेट लाइव टीवी देखने की दिशा में बड़ी पहल हुई है। सरकारी प्रसारक प्रसार भारती ने डायरेक्ट–टू–मोबाइल (D2M) तकनीक की सफल टेस्टिंग कराई है। इस तकनीक के जरिए मोबाइल नेटवर्क या डेटा कनेक्शन के बिना ही फोन पर लाइव टीवी चैनल प्रसारित किए जा सकेंगे। हालांकि, इस परीक्षण में जियो, एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया जैसी प्रमुख टेलिकॉम कंपनियों को शामिल नहीं किए जाने पर सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) ने आपत्ति जताई है।
क्या है D2M तकनीक?
D2M एक ब्रॉडकास्ट आधारित तकनीक है, जिसके तहत टीवी सिग्नल सीधे मोबाइल फोन तक पहुंचते हैं। इसके लिए टेलिकॉम टावर या इंटरनेट की जरूरत नहीं होती। माना जा रहा है कि इसका सबसे अधिक लाभ ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को मिलेगा। आपात स्थितियों में अलर्ट और जरूरी सूचनाएं भी सीधे मोबाइल तक पहुंचाई जा सकेंगी।
कहां तक पहुंचा परीक्षण?
प्रसार भारती और आईआईटी कानपुर के बीच 2019 में हुए समझौते के तहत D2M तकनीक का परीक्षण किया गया। इसका उद्देश्य यह जांचना था कि कहीं इस तकनीक से मोबाइल सेवाओं में बाधा तो नहीं आएगी और क्या लाइव टीवी प्रसारण से फोन के अधिक गर्म होने जैसी समस्याएं पैदा होंगी।
‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, आईआईटी कानपुर ने टेलिकॉम इंजीनियरिंग सेंटर और एराकॉन टेक्नोलॉजी के साथ मिलकर D2M-सपोर्टेड मोबाइल फोन पर टेस्टिंग की। नवंबर 2025 में आई रिपोर्ट में कहा गया कि इस तकनीक से मोबाइल सिग्नलों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ता और किसी तरह की बड़ी तकनीकी चिंता सामने नहीं आई।
COAI की आपत्ति क्या है?
COAI का कहना है कि D2M ब्रॉडकास्टिंग से जुड़े तकनीकी परीक्षणों में टेलिकॉम कंपनियों को शामिल नहीं किया गया, जो चिंताजनक है। संगठन के अनुसार, बिना सभी हितधारकों को साथ लिए इस तरह की प्रक्रिया अपनाने से भविष्य में सिग्नल इंटरफेरेंस जैसी समस्याएं आ सकती हैं। COAI ने टेस्ट रिपोर्ट पर हैरानी जताते हुए कहा कि टेलिकॉम ऑपरेटर्स की भागीदारी के बिना किए गए निष्कर्ष अधूरे हो सकते हैं।
आगे की राह
D2M तकनीक को देशभर में लागू करने से पहले नियामकीय स्पष्टता और सभी पक्षों की सहभागिता जरूरी मानी जा रही है। यदि संतुलित तरीके से इसे लागू किया गया, तो यह तकनीक मोबाइल ब्रॉडकास्टिंग के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है।