Friday, January 9

रूसी तेल टैंकर की जब्ती पर भड़का मॉस्को, पुतिन के करीबी नेता ने अमेरिका को दी परमाणु हमले की धमकी

 

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अटलांटिक महासागर में रूसी झंडे वाले तेल टैंकर को अमेरिकी नौसेना द्वारा जब्त किए जाने के बाद रूस और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस कार्रवाई को रूस ने अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी और रूसी संसद (स्टेट ड्यूमा) की रक्षा समिति के उप प्रमुख एलेक्सी ज़ुरावलेव ने अमेरिका को खुले तौर पर सैन्य और यहां तक कि परमाणु कार्रवाई की धमकी दी है।

 

ज़ुरावलेव ने अमेरिकी कदम को “खुलेआम समुद्री डकैती” करार देते हुए कहा कि रूसी झंडा लगे जहाज को जब्त करना वस्तुतः रूसी क्षेत्र पर हमला है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि रूस के सैन्य सिद्धांत में ऐसे हमलों के जवाब में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का प्रावधान है। उन्होंने यहां तक कहा कि अमेरिका को जवाब देने के लिए टॉरपीडो हमले या अमेरिकी नौसैनिक जहाजों को डुबोने जैसे विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए।

 

जानकारी के मुताबिक, अमेरिका ने वेनेजुएला से रवाना हुए जंग लगे ‘मेरिनेरा’ नामक तेल टैंकर का करीब दो सप्ताह तक पीछा करने के बाद उस पर कब्जा कर लिया। यह टैंकर रूसी झंडे के तहत संचालित हो रहा था और वेनेजुएला के तेल की ढुलाई कर रहा था। इस कार्रवाई को रूस में राष्ट्रपति पुतिन की “गंभीर बेइज्जती” के तौर पर देखा जा रहा है।

 

रूस के वरिष्ठ सांसद आंद्रेई क्लिशस ने भी इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का खुला उल्लंघन बताया। वहीं रूस के परिवहन मंत्री ने कहा कि अमेरिकी नौसेना के जहाज पर चढ़ने के बाद टैंकर से संपर्क पूरी तरह टूट गया है।

 

दूसरी ओर, अमेरिका ने अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा है कि वेनेजुएला के तेल पर लगाई गई नाकाबंदी पूरी तरह लागू है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि रूस से जुड़े तेल टैंकरों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा, “जब राष्ट्रपति बोलते हैं, तो वह मजाक नहीं करते। अमेरिका अपने हितों की रक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाने वाली सरकार है।”

 

सूत्रों के अनुसार, टैंकर की सुरक्षा के लिए रूस ने अपनी पनडुब्बी भी तैनात की थी, इसके बावजूद अमेरिकी नौसेना ने जहाज पर कब्जा कर लिया। इस घटना ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है और आशंका जताई जा रही है कि यह टकराव आने वाले दिनों में और गंभीर रूप ले सकता है।

 

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