
नई दिल्ली: ‘मेटल किंग’ के नाम से मशहूर अनिल अग्रवाल, बिहार के मारवाड़ी परिवार से ताल्लुक रखने वाले और देश के टॉप रईसों में शामिल उद्योगपति, ने कड़ी मेहनत और संघर्ष के दम पर अपना मुकाम हासिल किया। उनका कारोबार कई देशों में फैला हुआ है और वेदांता ग्रुप के जरिए उन्होंने भारत और विदेश में अपनी पकड़ मजबूत की है।
अनिल अग्रवाल का जन्म बिहार में हुआ और मात्र 20 साल की उम्र में वे खाली हाथ मुंबई आए। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1970 में कबाड़ के धंधे से की और सालों तक संघर्ष किया। शुरुआती कई प्रयास असफल रहे, लेकिन 1986 में भारत सरकार द्वारा टेलीफोन केबल बनाने के लिए प्राइवेट सेक्टर को अनुमति मिलने के बाद उनकी किस्मत बदली। उन्होंने स्टरलाइट इंडस्ट्रीज खरीदी और 1990 में कॉपर रिफाइनिंग का काम शुरू किया।
वेदांता ग्रुप और वैश्विक कारोबार:
आज वेदांता रिसोर्सेज दुनियाभर में मिनरल्स, ऑयल और गैस के क्षेत्र में सक्रिय है। कंपनी का बिजनेस भारत, अफ्रीका, आयरलैंड और ऑस्ट्रेलिया तक फैला है और इसके करीब 64,000 कर्मचारी और कॉन्ट्रैक्टर्स काम करते हैं। कंपनी के प्रोडक्ट्स दुनियाभर में बेचे जाते हैं।
नेटवर्थ और रैंकिंग:
फोर्ब्स के अनुसार, अनिल अग्रवाल की नेटवर्थ लगभग 3 अरब डॉलर यानी करीब 27,000 करोड़ रुपये है। यह उन्हें भारत के टॉप 100 अमीरों में शामिल करता है।
अनिल अग्रवाल की कहानी मेहनत, संघर्ष और दूरदर्शिता की मिसाल है, जिसने उन्हें न केवल भारत में बल्कि दुनियाभर में पहचान दिलाई।