
शहडोल: हाईकोर्ट ने शहडोल कलेक्टर केदार सिंह की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए उन्हें दो लाख रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया है। मामला एक निर्दोष व्यक्ति सुशांत सिंह बैस पर गलत तरीके से राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) लगाने का है।
कोर्ट ने कलेक्टर की तुलना महाभारत की गांधारी से करते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे कलेक्टर आंखों पर पट्टी बांधकर काम कर रहे हैं। युगलपीठ न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह ने कलेक्टर को अवमानना का नोटिस भी जारी किया।
पुलिस के प्रस्ताव पर NSA
मामला शहडोल जिले के बुढ़वा गांव के सुशांत सिंह बैस से जुड़ा है। सुशांत खेती और मटेरियल सप्लाई का काम करते हैं और अवैध रेत खनन के खिलाफ आवाज उठाते रहे थे। इस कारण रेत माफिया नाराज हुआ और उनके खिलाफ फर्जी चोरी और मारपीट के मामले दर्ज कराए गए।
उसके बाद शहडोल पुलिस प्रशासन के प्रस्ताव पर कलेक्टर ने बिना जांच-पड़ताल NSA लगा दी, और सुशांत को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
सिर्फ टाइपिंग की गलती
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पता चला कि यह सभी की गलती एक टाइपिंग की वजह से हुई थी। दरअसल, NSA की कार्रवाई नीरज कांत द्विवेदी नाम के अपराधी पर होनी थी, लेकिन कलेक्ट्रेट के बाबू ने गलती से सुशांत का नाम लिख दिया।
न्यायालय ने जताई नाराजगी
याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि कलेक्टर ने स्वतंत्र गवाहों के बयान नहीं लिए और फाइल का ठीक से अध्ययन नहीं किया। कोर्ट ने इसे बुद्धि का प्रयोग न करना बताते हुए प्रशासनिक लापरवाही करार दिया।
सुशांत एक साल से अधिक समय जेल में रह चुके थे। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि कलेक्टर 30 दिनों के भीतर 2 लाख रुपये अपनी जेब से भरें, जो पीड़ित सुशांत सिंह बैस के खाते में मुआवजे के तौर पर जमा होंगे।