
पटना: बिहार की राजनीति में सवाल गूंज रहा है—नीतीश कुमार के बाद जेडीयू का उत्तराधिकारी कौन? इस दिशा में पार्टी के भीतर यह मांग उठ रही है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार राजनीति की कमान संभालें।
नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार का राजनीतिक अनुभव सीमित है, लेकिन उनका शांत, शिष्ट और मृदुभाषी व्यक्तित्व उन्हें राजनीति में सफल होने का मौका दे सकता है। उनके सामने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक का उदाहरण है। नवीन पटनायक भी शुरुआत में राजनीति से दूर थे, लेकिन अपने गुणों और जनता के प्रति समर्पण के दम पर उन्होंने ओडिशा की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई और परिवारवाद के आरोपों को ध्वस्त कर दिया।
निशांत कुमार भी 50 साल की उम्र तक राजनीति से दूर रहे। उन्होंने कम्प्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और आध्यात्मिक रुचि रखते हैं। इसके बावजूद वे अपने पिता के समर्थन में जनसमर्थन जुटाते रहे हैं और उनके प्रशासन की नीतियों के प्रशंसक हैं। उनके सहज और सरल स्वभाव को जेडीयू में नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं ने भी निशांत कुमार के राजनीतिक सक्रिय होने की वकालत की है। पिछले महीने पार्टी कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कहा था, “हर कोई चाहता है कि निशांत कुमार राजनीति में सक्रिय हों।” ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने भी उनका समर्थन किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निशांत कुमार समय रहते राजनीति में कदम रखते हैं और योग्य नेतृत्व का परिचय देते हैं, तो उनका प्रवेश वंशवाद के आरोप को भी चुनौती दे सकता है। बिहार की राजनीति में अब यह देखा जाएगा कि क्या निशांत कुमार अपनी सहजता और योग्यता के दम पर पार्टी और जनता का विश्वास जीत पाते हैं।