
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने के ऐलान ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका वेनेजुएला की अंतरिम सरकार से 3 से 5 करोड़ बैरल हाई-क्वालिटी कच्चा तेल खरीदेगा। यह तेल बाजार भाव पर बेचा जाएगा और इससे मिलने वाली राशि का नियंत्रण अमेरिका के पास रहेगा। इस कदम का सीधा असर यह हुआ कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई—जो भारत के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।
घोषणा के तुरंत बाद अमेरिकी कच्चे तेल के वायदा भाव 1.3 प्रतिशत गिरकर 56.39 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए। भारत के लिए यह इसलिए अहम है, क्योंकि देश अपनी करीब 88 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरत आयात के जरिए पूरी करता है।
भारत के लिए क्यों है राहत की खबर
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत के आयात बिल और महंगाई—दोनों पर सकारात्मक असर डालती है। फरवरी 2021 के बाद पहली बार भारत का क्रूड ऑयल बास्केट 60 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आया है। अनुमान है कि यदि कीमतों में प्रति बैरल 1 डॉलर की गिरावट आती है, तो भारत के सालाना तेल आयात खर्च में करीब 13,000 करोड़ रुपये की बचत होती है।
बाजार संकेत दे रहे हैं कि जून तक कच्चे तेल के दाम 50 डॉलर प्रति बैरल या उससे नीचे भी जा सकते हैं। ऐसा हुआ तो भारत को अपने आयात बिल में बड़ी राहत मिलेगी। पिछले वित्त वर्ष में भारत ने कच्चे तेल के आयात पर करीब 161 अरब डॉलर खर्च किए थे।
बाजार में वेनेजुएला के तेल की वापसी तय
ट्रंप ने अमेरिकी ऊर्जा सचिव को इस योजना को तत्काल लागू करने के निर्देश दिए हैं। तेल को स्टोरेज जहाजों के माध्यम से सीधे अमेरिका के अनलोडिंग डॉक तक लाया जाएगा। इसके साथ ही ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में बड़े निवेश पर विचार कर सकती हैं।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, घोषित तेल मात्रा वेनेजुएला के उस उत्पादन के बराबर है, जो हालिया घटनाक्रम से पहले 30 से 50 दिनों में होता था। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार—करीब 300 अरब बैरल—मौजूद है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और कमजोर बुनियादी ढांचे के कारण उसका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।
भारत को कैसे होगा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वेनेजुएला का तेल वैश्विक बाजार में बड़े पैमाने पर लौटता है, तो इससे कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव बनेगा। यह स्थिति भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए फायदेमंद है। सस्ता कच्चा तेल न केवल आयात बिल घटाएगा, बल्कि ईंधन महंगा होने से पैदा होने वाले महंगाई के दबाव को भी कम करेगा।
इसी वजह से ट्रंप के इस ऐलान को भारत में “चुपचाप राहत देने वाला फैसला” माना जा रहा है—जिसका असर आने वाले महीनों में अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दे सकता है।