Thursday, January 8

भारत को चाहिए 1500 पैसेंजर विमान, रूस बढ़ा चुका हाथ, फ्रांस का भी साथ जरूरी?

 

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भारत का एविएशन सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है और अगले 10 सालों में देश को कम से कम 1500 से अधिक पैसेंजर विमान की आवश्यकता होगी। घरेलू मार्केट में इंडिगो और एयर इंडिया सबसे बड़े खिलाड़ी हैं, जिनकी कुल बाजार हिस्सेदारी लगभग 90 प्रतिशत है। दोनों एयरलाइंस ने अगले दशक में 1500 विमान के ऑर्डर की मांग की है, जो भारतीय एविएशन बाजार के विस्तार को दर्शाता है।

 

हालांकि, वर्तमान में अमेरिकी कंपनी बोइंग और यूरोपीय एयरबस दुनिया के 86 प्रतिशत पैसेंजर विमानों का निर्माण करती हैं, लेकिन 2024 के बाद ये मांग के अनुसार सप्लाई नहीं कर पा रही हैं। इसका असर भारतीय बाजार पर पड़ने की संभावना है।

 

इसीलिए सवाल फिर उठता है—क्या भारत को खुद पैसेंजर विमान बनाने चाहिए? इस दिशा में उम्मीदें तब बढ़ी जब अक्टूबर 2025 में भारत ने रूस के साथ SJ-100 पैसेंजर प्लेन के भारत में निर्माण के लिए प्रारंभिक समझौता किया।

 

SJ-100: रूस का 103 सीटर विमान

SJ-100 एक डबल इंजन पैसेंजर विमान है, जिसकी क्षमता 103 यात्रियों की है। इसे रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) बनाती है और कई रूसी एयरलाइंस पहले ही इसका इस्तेमाल कर रही हैं। दिल्ली इस विमान को घरेलू एविएशन उद्योग के लिए गेमचेंजर मान रही है।

 

हालांकि, विशेषज्ञ प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता पर सवाल उठा रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या रूस भारत में तेजी से उत्पादन शुरू कर सकेगा, क्योंकि अमेरिकी और यूरोपीय प्रतिबंधों के कारण रूस कई मोर्चों पर संघर्ष कर रहा है।

 

इंजन: फ्रांस के बिना मुश्किल

SJ-100 में रूसी SaM146 टर्बोफैन इंजन लगा है, जिसे NPO Saturn (रूस) और Safran (फ्रांस) ने मिलकर विकसित किया था। लेकिन जियो-पॉलिटिकल तनाव के कारण फ्रांस ने अब टेक्निकल सपोर्ट, स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस सेवाएं बंद कर दी हैं।

 

इससे भारत में उत्पादन और संचालन की संभावना पर सवाल खड़ा हो गया है। रूस अब नए इंजन के विकास की कोशिश कर रहा है, लेकिन वह ज्यादा ईंधन खपत करेगा, जिससे एयरलाइंस की लागत बढ़ सकती है। ऐसे में भारत फ्रांस को इंजन के लिए पार्टनर बनाने पर विचार कर रहा है ताकि कम ईंधन खपत वाला भरोसेमंद इंजन सुनिश्चित किया जा सके।

 

निष्कर्ष

भारत के लिए यह निर्णय चुनौतीपूर्ण है—रूस के साथ संयुक्त निर्माण योजना कारगर साबित होगी या नहीं, और क्या फ्रांस तकनीकी सहयोग देगा। देश की घरेलू एविएशन क्षमता बढ़ाने के लिए SJ-100 पर निर्भरता एक बड़ा कदम हो सकता है, लेकिन इसमें कई जोखिम भी जुड़े हैं।

 

 

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