
इंदौर: भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से फैली बीमारी के कारण हुई मौतों के मामले में मध्य प्रदेश सरकार ने मृतकों के परिवारों को 2 लाख रुपये का मुआवज़ा प्रदान किया है। मंगलवार को कुल 18 परिवारों को चेक वितरित किए गए।
इंदौर के कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि केवल छह मौतों का दूषित पानी से सीधे संबंध साबित हुआ है, लेकिन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी प्रभावित परिवारों को राहत दी गई। कलेक्टर ने इस मौके पर कहा कि यह कदम प्रशासन की संवेदनशीलता का परिचायक है।
राजनीतिक सरगर्मी और सुरक्षा:
मंगलवार को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं का एक दल प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचा। इसके चलते इलाके में तनाव बढ़ गया और पुलिस को भारी सुरक्षा बल तैनात करना पड़ा। भागीरथपुरा को अस्थायी रूप से छावनी में बदलकर सभी एंट्री गेट्स को बैरिकेड्स से सील कर दिया गया। पूरे इलाके में वज्र वाहन (दंगा नियंत्रण वैन) तैनात थे।
पुलिस से बहस और विवाद:
जब कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल दोपहर करीब 1:00 बजे इलाके में प्रवेश करने लगा, तो सुरक्षा बलों ने उन्हें रोक दिया। इससे उमंग सिंघार और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई। हालांकि, कांग्रेस नेता अंततः वैकल्पिक मार्ग से इलाके में घुसने में सफल रहे और तीन पीड़ित परिवारों से मिले।
दौरे के बाद मीडिया से बात करते हुए जीतू पटवारी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि प्रशासन ने केवल 2 लाख रुपये का मुआवज़ा देकर पीड़ितों का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि रूटीन बैठकों पर लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद वास्तविक पीड़ितों को उचित सहायता नहीं दी गई।