
मुंबई। टीवी और फिल्मों की जानी-मानी अदाकारा सुधा चंद्रन ने हाल ही में एक इंटरव्यू में अपने काम और जीवन के अनुभवों के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि आखिरी सांस तक उनका काम चलता रहे और उनके चेहरे पर मेकअप तथा पैर में घुंघरू हमेशा हों।
सुधा ने अपने इंडस्ट्री में अनुभव के बारे में कहा, “मैं बहुत लकी हूं। मुझे कभी भी किसी तरह का भेदभाव नहीं मिला। लोगों ने हमेशा मुझे प्यार और सम्मान दिया। इस वजह से मुझे कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि मेरे साथ भेदभाव हुआ हो।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या कोई रोल ऐसा रहा जिसे वह करना चाहती थीं लेकिन नहीं कर पाईं, तो उन्होंने बताया, “मैं जितने भी रोल्स देखती हूं, मैं चाहती हूं कि उन सभी को मैं निभाऊं। मैं अपने कैरेक्टर्स के प्रति बहुत प्यार करती हूं। कई बार सोचती हूं कि ये रोल मुझे क्यों नहीं मिला। ये आग मेरे अंदर हमेशा रहती है।”
सुधा चंद्रन ने अपने काम के प्रति अपने समर्पण को भी स्पष्ट किया, “मेरा यही सपना है कि मरते दम तक मेरे चेहरे पर मेकअप रहे। अगर भगवान ने चाहा तो मेकअप और घुंघरू के साथ मैं इस दुनिया से विदा हो जाऊं। हर किसी को ऐसी मौत नहीं मिलती।”
सुधा चंद्रन का जन्म 21 सितंबर 1965 को हुआ। 16 साल की उम्र में हुए एक एक्सीडेंट में उनके पैर में गंभीर चोट लगी, जिसके कारण दाहिना पैर काटना पड़ा। इसके बाद उन्होंने जयपुर से आर्टिफिशियल पैर लगवाया और भरतनाट्यम में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
सुधा चंद्रन ने 1984 में ‘मयूरी’ से डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने हिंदी और साउथ की कई फिल्मों और टीवी शोज़ में काम किया। उनके लोकप्रिय टीवी शोज़ में शामिल हैं—‘विष्णु पुराण’, ‘कशमकश जिंदगी की’, ‘कस्तूरी’, ‘नागिन-2’ और ‘माता की चौकी – कलयुग में भक्ति की शक्ति’।
31 साल से शादीशुदा सुधा चंद्रन की कोई संतान नहीं है। वह अपनी कला और अभिनय के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं और कहते हैं कि उनका काम उनकी पहचान है।