
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने अमीर आरोपियों द्वारा कानून की वैधता को चुनौती देने की बढ़ती प्रवृत्ति पर कड़ा रुख अपनाया है। मंगलवार को इस बेंच ने उन याचिकाओं पर नाराजगी जताई, जिनमें धनी आरोपी अपनी वित्तीय स्थिति का फायदा उठाकर उन कानूनों को चुनौती देने की कोशिश कर रहे थे, जिनके तहत उनके खिलाफ मुकदमा चल रहा है।
यह टिप्पणी उस समय की गई जब सुप्रीम कोर्ट में 3,600 करोड़ रुपये के वीवीआईपी चॉपर घोटाले (अगस्ता वेस्टलैंड स्कैम) से जुड़ी सुनवाई चल रही थी। इस मामले में आरोपी गौतम खेतान के वकील ने अदालत से दलील दी थी कि वे मनी लॉन्ड्रिंग प्रिवेंशन एक्ट (PMLA) की एक विशेष धारा की वैधता को चुनौती दे रहे हैं।
सीजेआई सूर्यकांत का कड़ा संदेश
सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट कहा कि सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति वित्तीय रूप से संपन्न है और उसे असहजता महसूस हो रही है, वह सीधे सुप्रीम कोर्ट में पहुंचकर उन कानूनों की वैधता को चुनौती नहीं दे सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत अब इन याचिकाओं को गंभीरता से लेगी। उन्होंने इस प्रकार की याचिकाओं को “अनोखा प्रचलन” बताते हुए इसे गलत ठहराया और कहा कि धनाढ्य आरोपियों को भी अन्य नागरिकों की तरह ही मुकदमे का सामना करना पड़ेगा।
मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा मामला
खेतान के वकील ने बेंच से आग्रह किया कि उनकी याचिका को पहले से चल रही याचिकाओं के साथ जोड़ दिया जाए, जिसमें पीएमएलए के कुछ प्रावधानों की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट के 2022 के फैसले की समीक्षा की मांग की गई थी। लेकिन बेंच ने यह अनुरोध खारिज कर दिया और कहा कि अदालत केवल उनके मामलों पर सुनवाई करेगी जो कानून के तहत हैं, न कि केवल किसी व्यक्ति की वित्तीय स्थिति के आधार पर।
इस कड़े रुख ने यह स्पष्ट कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट धनाढ्य आरोपियों के खिलाफ कानून को चुनौती देने की इस प्रवृत्ति पर रोक लगाएगा और सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार करेगा।