Thursday, January 8

50 साल बाद तुर्कमान गेट के पास फिर गरजे बुलडोजर, क्या हम पागल हैं जो दूसरा पाकिस्तान बनने दें?

 

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नई दिल्ली: 6-7 जनवरी की दरम्यानी रात को दिल्ली के ऐतिहासिक तुर्कमान गेट इलाके में फिर से बुलडोजर एक्शन हुआ। इस बार दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर अवैध अतिक्रमण को हटाया गया। यह वही इलाका है जो 50 साल पहले भी विवादों में था, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी ने तुर्कमान गेट के आसपास की झुग्गियों को हटाने का आदेश दिया था।

 

संजय गांधी का फैसला और बुलडोजर एक्शन

कहा जाता है कि फरवरी 1976 में संजय गांधी जब दिल्ली की पुरानी गलियों से गुजर रहे थे, तो उन्होंने देखा कि तुर्कमान गेट के आसपास झुग्गियां और अवैध निर्माण इतने ज्यादा हो गए थे कि जामा मस्जिद भी ठीक से दिखाई नहीं दे रही थी। इसके बाद संजय गांधी ने फैसला लिया कि इन अवैध इमारतों और निर्माणों को गिरा दिया जाएगा। इस फैसले को लागू करने की जिम्मेदारी दी गई थी जगमोहन को, जो उस वक्त दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के वाइस-चेयरमैन थे।

 

विवादित बुलडोजर एक्शन

तत्कालीन आपातकाल के दौरान, अप्रैल 1976 में पहला बुलडोजर तुर्कमान गेट पहुंचा और वहां के अवैध निर्माणों को गिराना शुरू किया गया। आसफ अली रोड, कलां महल, दूजाना हाउस और तुर्कमान गेट के आसपास की झुग्गियों को जमींदोज कर दिया गया। इन लोगों को दूर-दराज के पुनर्वास कॉलोनियों में भेज दिया गया। इस दौरान 16 बुलडोजर दिन-रात काम कर रहे थे।

 

संजय गांधी का आदेश और विरोध

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, संजय गांधी ने अपनी मां इंदिरा गांधी से यह इच्छा जताई थी कि तुर्कमान गेट से जामा मस्जिद की पूरी दृश्यता मिलनी चाहिए, और इंदिरा गांधी ने इसे मंजूरी दे दी थी। इसके बाद, जगमोहन ने संजय गांधी के आदेश को लागू करते हुए तुर्कमान गेट से जामा मस्जिद के बीच आने वाली हर चीज को गिरा दिया। इस दौरान हजारों लोग विस्थापित हुए और उन्हें यमुना पार दूर-दराज के इलाकों में पुनर्वास के लिए भेजा गया।

 

“क्या हम पागल हैं?”

इस प्रक्रिया के दौरान, तुर्कमान गेट के लोग अपने विस्थापन के खिलाफ विरोध करने पहुंचे। जब जगमोहन से कहा गया कि उन्हें एक साथ रहने दिया जाए, तो उन्होंने जवाब दिया, “क्या आप समझते हैं कि हम पागल हैं कि एक पाकिस्तान तोड़कर दूसरा पाकिस्तान बन जाने दें?” इस बयान ने पूरे घटना को और भी विवादास्पद बना दिया।

 

फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास विरोध

अब, 50 साल बाद जब फिर से बुलडोजर एक्शन हुआ, तो फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास हजारों लोग धरने पर बैठ गए। विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस छोड़ी गई, और बाद में हवाई फायरिंग भी की गई। चूंकि इस समय आपातकाल लागू था, मीडिया में इस घटना की रिपोर्टिंग नहीं की जा सकी।

 

इस एक्शन के परिणामस्वरूप, हजारों लोग विस्थापित हुए, और यह घटना 50 साल बाद भी दिल्ली के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ बनकर उभरी है।

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