
इस्लामाबाद/नई दिल्ली। पाकिस्तान की सेना ने एक बार फिर भारत पर आतंकवाद को समर्थन देने का बेबुनियाद आरोप लगाकर नया विवाद खड़ा करने की कोशिश की है। पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने दावा किया है कि अफगानिस्तान में सक्रिय आतंकवादी तत्वों को भारत का समर्थन मिल रहा है। हालांकि, भारतीय खुफिया सूत्रों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पाकिस्तान की हताशा और अपनी नाकामियों से ध्यान भटकाने की रणनीति बताया है।
भारतीय सूत्रों का कहना है कि यह बयान ऐसे समय में आया है, जब चीन ने चीन–पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) की धीमी प्रगति और पाकिस्तान में चीनी नागरिकों की सुरक्षा को लेकर इस्लामाबाद को कड़ा संदेश दिया है।
रावलपिंडी से लगाए गए आरोप
रावलपिंडी में आयोजित प्रेस वार्ता में आईएसपीआर के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर “युद्ध अर्थव्यवस्था” बनाए रखने के लिए आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि इसके लिए भारत से फंडिंग और समर्थन मिल रहा है। चौधरी ने भड़काऊ टिप्पणी करते हुए कहा कि तालिबान शासन को एक “नया हीरो” मिल गया है, इशारों-इशारों में उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री की ओर संकेत किया।
उन्होंने आगे दावा किया कि वर्ष 2025 में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और भारत के बीच कथित गठजोड़ “पूरी तरह बेनकाब” हो चुका है और इससे क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा पैदा हुआ है। साथ ही, भारत और अफगानिस्तान को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे पाकिस्तान का सामना करना चाहते हैं, तो उनका स्वागत है।
चीन की नाराजगी से बढ़ी बेचैनी
सीएनएन-न्यूज की एक रिपोर्ट में भारतीय खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पाकिस्तानी सेना का यह बयान 4 जनवरी को बीजिंग में हुई सातवीं चीन–पाकिस्तान विदेश मंत्रियों की रणनीतिक वार्ता के बाद आया है। रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग ने पाकिस्तान में चीनी कर्मियों पर बढ़ते हमलों और सीपीईसी परियोजनाओं की सुस्त रफ्तार पर गहरी नाराजगी जताई है।
सूत्रों का कहना है कि चीन के दबाव से घबराकर पाकिस्तान अब बाहरी दुश्मन गढ़ने की कोशिश कर रहा है, ताकि अपनी प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी विफलताओं से ध्यान हटाया जा सके।
नाकामी छिपाने की कोशिश
भारत और अफगानिस्तान पर आरोप मढ़कर पाकिस्तानी सेना असल में सीपीईसी को समय पर पूरा न कर पाने और देश के भीतर बिगड़ती सुरक्षा स्थिति की जिम्मेदारी से बचना चाहती है। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान ने बीते तीन महीनों से अफगानिस्तान के साथ अपनी सीमा बंद कर रखी है और इसे आतंकवाद रोकने के लिए जरूरी कदम बताया है।
भारतीय सूत्रों ने आईएसपीआर के दावों को “पुराना और घिसा-पिटा प्रोपेगैंडा” करार देते हुए कहा कि इन आरोपों के समर्थन में कोई भी विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय सबूत मौजूद नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान बार-बार ऐसे आरोप लगाकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने की कोशिश करता रहा है, लेकिन सच्चाई यह है कि क्षेत्रीय अस्थिरता की जड़ खुद उसकी नीतियों में छिपी है।