Thursday, January 8

दुश्मन के ड्रोन हमलों से सुरक्षा करेगा खास ‘कवच’, जानें CUAS में तीनों सेनाओं की भूमिका

 

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नई दिल्ली: भारत, दुश्मन के ड्रोन हमलों का मुकाबला करने के लिए एक नई रणनीति के तहत एक जॉइंट काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम (CUAS) ग्रिड बना रहा है। यह पहल मौजूदा एयर डिफेंस नेटवर्क से अलग होगी और इसका उद्देश्य ड्रोन गतिविधियों पर निगरानी रखना है, साथ ही तीनों सेनाओं द्वारा खरीदे गए काउंटर-ड्रोन सिस्टम्स को एक साथ इंटीग्रेट करना है।

 

CUAS ग्रिड का उद्देश्य

भारत सरकार ने एयर डिफेंस को मजबूत करने के लिए ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ के तहत एक बड़ा शील्ड बनाने की दिशा में काम किया है, वहीं CUAS ग्रिड को बनाने की योजना भी इस सुरक्षा कवच का हिस्सा है। जॉइंट CUAS ग्रिड को तीनों सेनाओं के काउंटर-ड्रोन सिस्टम्स के साथ जोड़ा जाएगा और यह मौजूदा इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) से अलग होगा। इसके माध्यम से दुश्मन के ड्रोन हमलों पर निगरानी रखी जाएगी और उन्हें नाकाम किया जाएगा।

 

तीनों सेनाओं का सामूहिक योगदान

CUAS ग्रिड को मौजूदा जॉइंट एयर डिफेंस सेंटर्स (JADC) के साथ मिलकर तैयार किया जाएगा, जिसमें भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना शामिल होंगी। इसका मुख्य उद्देश्य ड्रोन हमलों की पहचान और उनका प्रभावी तरीके से मुकाबला करना होगा। यह नेटवर्क तीनों सेनाओं के काउंटर-ड्रोन एयर डिफेंस सिस्टम्स को एकीकृत करेगा, जो पिछले पांच से दस सालों में विभिन्न सेनाओं द्वारा खरीदी गई काउंटर-ड्रोन तकनीकों से लैस होंगे।

 

CUAS की आवश्यकता क्यों पड़ी?

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी सेना ने तुर्की और चीन के ड्रोन का इस्तेमाल कर भारतीय नागरिक और सैन्य ठिकानों पर हमले की कोशिश की। हालांकि, भारतीय सेना ने अपनी कड़ी सुरक्षा उपायों से इन ड्रोन हमलों को प्रभावी ढंग से नाकाम कर दिया। भारतीय सेना की L-70 और ZU-23 एयर-डिफेंस गन ने छोटे ड्रोन को काफी नुकसान पहुंचाया।

 

अब भारतीय सेना आबादी वाले इलाकों में भी एयर डिफेंस गन तैनात करने की योजना बना रही है, ताकि नागरिकों और सैन्य ठिकानों को ड्रोन और अन्य हवाई हमलों से बचाया जा सके।

 

मिशन सुदर्शन चक्र और सरकार की योजना

ऊपरी स्तर पर, भारतीय सरकार मिशन सुदर्शन चक्र के तहत एक व्यापक हवाई सुरक्षा शील्ड बनाने पर काम कर रही है। इसके लिए एक कमेटी बनाई जा चुकी है, और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ को तीनों सेनाओं को एकीकृत करने और उनके बीच तालमेल बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

 

इस तरह से भारत दुश्मन के ड्रोन हमलों का सामना करने के लिए एक प्रभावी और सामूहिक सुरक्षा कवच तैयार कर रहा है, जो भविष्य में देश की रक्षा क्षमता को और भी सशक्त बनाएगा।

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