
नई दिल्ली: अमेरिका की एक प्रमुख लॉबिंग फर्म, SHW Partners LLC, ने अमेरिकी सरकार के अधिकारियों के साथ भारत के कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने में अपनी भूमिका का खुलासा किया है। इस फर्म ने अपने रिकॉर्ड में जानकारी दी है कि उसने भारतीय दूतावास के लिए अमेरिकी अधिकारियों के साथ मुलाकातें और संपर्क स्थापित करने में मदद की, जिनमें ईमेल और फोन कॉल के माध्यम से बातचीत आयोजित की गई थी।
यह फर्म फॉरेन एजेंट रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के तहत अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस में इस प्रकार के कई ब्योरे दाखिल कर चुकी है। इन रिकॉर्ड्स के मुताबिक, 10 मई 2025 को जब भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम की घोषणा की गई, तब भी भारतीय दूतावास ने अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संपर्क साधा था।
भारत सरकार के सूत्रों के अनुसार, यह एक स्थापित प्रक्रिया है, जिसके तहत भारतीय दूतावास हमेशा से अमेरिकी लॉबिंग फर्म्स की सेवाएं लेता आया है। भारत के दूतावास ने 1950 से इस प्रकार की सेवाओं का उपयोग किया है और यह विदेशी सरकारों के लिए अमेरिका में लॉबिंग करने का एक सामान्य और कानूनी तरीका है।
राष्ट्रपति ट्रंप के पूर्व सलाहकार की भूमिका
ये रिकॉर्ड्स बताते हैं कि SHW Partners LLC ने भारतीय दूतावास और ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों के बीच कई मुलाकातों का आयोजन किया। फर्म के पास 24 अप्रैल 2025 से एक करार था और इस दौरान फर्म ने ट्रंप के पूर्व सलाहकार जेसन मिलर के साथ भी मुलाकात की थी।
ऑपरेशन सिंदूर पर मीडिया कवरेज पर चर्चा
इन रिकॉर्ड्स में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर मीडिया कवरेज पर चर्चा भी सामने आई है। 23 जून 2025 को भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिकी अधिकारियों के साथ चार अलग-अलग मुलाकातों के लिए रिक्वेस्ट की गई थी। इनमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और सीआईए निदेशक जॉन रैक्ट लाइफ के साथ बैठकें शामिल थीं। इसके अलावा, विदेश सचिव विक्रम मिस्री और भारत के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के लिए भी मीटिंग की रिक्वेस्ट की गई।
इस प्रकार, अमेरिकी लॉबिंग फर्म ने भारत के लिए कई रणनीतिक संपर्क स्थापित किए और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को और मजबूत करने में मदद की।