
चाईबासा (झारखंड): पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी प्रखंड में जंगली हाथियों का आतंक अब भयावह रूप ले चुका है। मंगलवार की रात को एक जंगली हाथी ने दो गांवों में कहर बरपाया, जिसमें छह ग्रामीणों की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे झारखंड को झकझोर कर रख दिया है। मृतकों में बवाडिया गांव के चार सदस्य और बडापासेया गांव का एक व्यक्ति शामिल हैं।
घटना का विवरण
नवीनतम जानकारी के अनुसार, यह हमला रात के समय हुआ, जब जंगली हाथी अचानक रिहायशी इलाके में घुस आया और सो रहे ग्रामीणों पर हमला कर दिया। बवाडिया गांव में पुआल से बने झोपड़े में सो रहे परिवार के पांच सदस्य और बडापासेया गांव के एक व्यक्ति की मौत हो गई। इस हमले में चार अन्य ग्रामीण भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें से एक की हालत अत्यंत नाजुक बताई जा रही है। सभी घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया है।
मृतकों का विवरण
मृतकों में से चार लोग एक ही परिवार के बताए जा रहे हैं, जिससे बवाडिया गांव में मातम पसरा हुआ है। सभी मृतक पुआल से बने घर में सो रहे थे, और जंगली हाथी ने रात के अंधेरे में उन पर हमला कर दिया। एक सदस्य किसी तरह भागकर जान बचाने में सफल रहा, जबकि एक अन्य के पैर कुचल गए।
वन विभाग की लापरवाही पर आरोप
घटना के बाद, वनरक्षी अमित महतो और अन्य अधिकारियों ने इस घटना की पुष्टि की। हालांकि, वन विभाग की टीम ने पूरे क्षेत्र में माइक सेट लगाकर जागरूकता फैलाने का प्रयास किया था, लेकिन ग्रामीणों ने इसे हल्के में लिया और पुआल से बने घरों में ही सोते रहे। अधिकारियों ने इस पर खेद जताया कि चेतावनी के बावजूद लोग सावधान नहीं हुए।
हाथी का आतंक जारी
हाथी का आतंक इससे पहले भी जारी था। पिछले सात दिनों में इस हाथी के हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है। हाथी के झुंड से बिछड़ने के बाद वह गितिकेंदू गांव तक पहुंच चुका है और वर्तमान में वह काटेपाडा गांव में है।
विभागीय कार्रवाई
इस लगातार हो रहे नुकसान को देखते हुए, पश्चिम बंगाल से एक विशेष टीम को बुलाया गया है ताकि दंतेल हाथी को पकड़ा जा सके और इस आतंक को रोका जा सके। वन विभाग से मांग की गई है कि इस जंगली हाथी को पकड़ने या सुरक्षित जंगल क्षेत्र में खदेड़ा जाए ताकि आगे की हिंसा रोकी जा सके।
आगे की स्थिति
यह घटनाएं पश्चिमी सिंहभूम जिले में जंगली हाथियों के बढ़ते आतंक की ओर इशारा करती हैं। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन से इस समस्या के समाधान के लिए जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि इन निर्दोष ग्रामीणों की जान बचाई जा सके और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।