
नई दिल्ली।
हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा खुश, आत्मविश्वासी और मानसिक रूप से मजबूत बने। लेकिन कई बार रोजमर्रा की कुछ आदतें अनजाने में बच्चों की मेंटल हेल्थ पर नकारात्मक असर डाल देती हैं। नतीजा यह होता है कि बच्चे भीतर ही भीतर डर और तनाव से जूझने लगते हैं, जबकि माता-पिता को इसकी भनक तक नहीं लगती।
पेरेंटिंग एक्सपर्ट इशिन्ना बी सदाना ने हाल ही में एक वीडियो के जरिए ऐसी ही कुछ आदतों के बारे में बताया है, जो बच्चों को सहमा-सहमा और चिंतित बना सकती हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि समय रहते इन आदतों को पहचानकर उनमें सुधार किया जाए, तो बच्चों का मानसिक विकास बेहतर हो सकता है।
1. बच्चों से अवास्तविक उम्मीदें रखना
एक्सपर्ट के अनुसार, कई माता-पिता बच्चों से ऐसी उम्मीदें रखते हैं, जो उनकी उम्र और भावनात्मक क्षमता से कहीं अधिक होती हैं। वे चाहते हैं कि बच्चा हर हाल में सही व्यवहार करे, चाहे वह कितना भी परेशान क्यों न हो। यह दबाव बच्चों को भीतर से कमजोर बना देता है।
2. छोटी बातों पर जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया देना
कुछ पेरेंट्स बच्चों की छोटी-छोटी गलतियों पर जरूरत से ज्यादा गुस्सा करते हैं या आवाज ऊंची कर लेते हैं। बार-बार डांट और चीख-चिल्लाहट बच्चों में डर और असुरक्षा की भावना पैदा करती है।
3. बात मनवाने के लिए धमकी देना
बच्चों को डराने के लिए कही गई बातें, जैसे— “अभी नहीं आए तो यहीं छोड़ दूंगा”—उनके दिमाग पर गहरा असर डालती हैं। इस तरह की धमकियां बच्चों के मन में स्थायी डर पैदा कर सकती हैं।
4. बच्चों की भावनाओं को नजरअंदाज करना
बच्चों की परेशानी को यह कहकर टाल देना कि “इतनी बड़ी बात नहीं है” या “रोने की जरूरत नहीं” उनकी भावनाओं को दबाने जैसा है। इससे बच्चे खुद को अकेला और अनसुना महसूस करने लगते हैं।
5. हर समय जल्दबाजी का दबाव बनाना
हर काम में बच्चों को बार-बार जल्दी करने को कहना—जैसे “जल्दी करो, हम लेट हो रहे हैं”—उन्हें मानसिक रूप से बेचैन बना सकता है। इससे बच्चों में तनाव और घबराहट बढ़ती है।
समय रहते सुधार है जरूरी
पेरेंटिंग एक्सपर्ट का कहना है कि माता-पिता अगर बच्चों की भावनाओं को समझें, धैर्य रखें और संवाद बढ़ाएं, तो बच्चे खुद को सुरक्षित और आत्मविश्वासी महसूस करते हैं। स्वस्थ पेरेंटिंग ही बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की मजबूत नींव रखती है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो पर आधारित है। किसी भी सलाह को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की राय अवश्य लें।