Saturday, March 28

कैथल पर क्यों मेहरबान राजस्थान के तीन सांसद? एमपीएलएडी फंड को लेकर सियासी घमासान

 

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हरियाणा के कैथल विधानसभा क्षेत्र में राजस्थान के तीन कांग्रेस सांसदों द्वारा सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (एमपीएलएडी) से विकास कार्यों की सिफारिश किए जाने पर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। यह वही विधानसभा क्षेत्र है, जहां से वरिष्ठ कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला के बेटे आदित्य सुरजेवाला विधायक हैं। इस मुद्दे को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं।

 

भाजपा का आरोप है कि राजस्थान की जनता के विकास के लिए मिलने वाली निधि को हरियाणा में खर्च करने की सिफारिश कर कांग्रेस ने राजनीतिक मिलीभगत और परिवारवाद का उदाहरण पेश किया है। वहीं कांग्रेस इसे नियमों के तहत लिया गया फैसला बता रही है।

 

कैसे सामने आया मामला

बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने इस मामले को सार्वजनिक करते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान से लोकसभा सांसद राहुल कस्वां (चूरू), संजना जाटव (भरतपुर) और बृजेंद्र सिंह ओला (झुंझुनूं) ने अपने-अपने एमपीएलएडी फंड से क्रमशः 50 लाख रुपये, 45.5 लाख रुपये और 24.7 लाख रुपये हरियाणा के कैथल विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए अनुशंसा की है। संयोग से यही क्षेत्र आदित्य सुरजेवाला का विधानसभा क्षेत्र है।

 

आदित्य सुरजेवाला का राजनीतिक परिचय

आदित्य सुरजेवाला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला के बेटे हैं। उनके दादा शमशेर सिंह सुरजेवाला पांच बार विधायक रह चुके हैं। रणदीप सुरजेवाला स्वयं 2009 और 2014 में कैथल से विधायक रहे। आदित्य सुरजेवाला ने कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय से वाणिज्य में स्नातक किया है और बेंगलुरु के इंटरनेशनल स्कूल से स्कूली शिक्षा प्राप्त की।

2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में आदित्य ने कैथल सीट से 8,124 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की और 25 वर्ष की उम्र में राज्य के सबसे युवा विधायकों में शामिल हुए।

 

बीजेपी ने उठाए सवाल

भाजपा का कहना है कि एमपीएलएडी फंड का उद्देश्य सांसद के अपने क्षेत्र का विकास करना है। ऐसे में दूसरे राज्य में फंड खर्च करने की सिफारिश करना जनता के साथ अन्याय है। अमित मालवीय ने इसे राजस्थान की जनता के साथ “लूट” करार देते हुए कहा कि यह कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और परिवारवाद को उजागर करता है।

बताया जा रहा है कि जिन कार्यों के लिए फंड की सिफारिश की गई है, उनमें ढंके हुए बैठने के स्थान, सार्वजनिक पुस्तकालय, सड़कें, स्कूल-कॉलेजों में कक्षाओं का निर्माण, सामुदायिक केंद्र, सुरक्षा द्वार और ऊर्जा दक्ष श्मशान घाट शामिल हैं।

 

कांग्रेस की सफाई

इस पूरे विवाद पर चूरू से कांग्रेस सांसद राहुल कस्वां ने कहा कि उन्होंने संविधान और एमपीएलएडी योजना के तहत मिले अधिकारों का ही उपयोग किया है। उनके अनुसार, सांसद देश में कहीं भी विकास कार्यों के लिए निधि की सिफारिश कर सकते हैं और इसमें नियमों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है।

 

फिलहाल इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। एक ओर भाजपा इसे राजनीतिक पक्षपात बता रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस इसे पूरी तरह नियमसम्मत निर्णय करार दे रही है।

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