
वॉशिंगटन: अमेरिका की सबसे खतरनाक कमांडो यूनिट डेल्टा फोर्स दुनिया भर में अपनी साहसिक और बेहद रिस्की ऑपरेशन्स के लिए जानी जाती है। इन्हें अक्सर ‘शैडो आर्मी’ कहा जाता है। डेल्टा फोर्स के कमांडो को वही मिशन सौंपे जाते हैं, जहां गलती की कोई गुंजाइश नहीं होती।
हाल ही में डेल्टा फोर्स ने वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोला मादुरो को उनके घर से पकड़ने का ऑपरेशन अंजाम दिया। अमेरिकी बेस से लगभग 150 विमानों ने उड़ान भरी और एक घंटे तक सैन्य ठिकानों पर हमला किया। टॉमहॉक मिसाइलों ने वेनेजुएला के रूसी एस-300 एयर डिफेंस सिस्टम को तबाह कर दिया, जबकि इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर विमानों ने वहां की कम्युनिकेशन प्रणाली को जाम किया। इस दौरान सैटेलाइट, रीपर ड्रोन और सीआई एजेंट हर गतिविधि पर नजर रख रहे थे। अमेरिका के डेल्टा फोर्स कमांडो ने MH-60 ब्लैक हॉक्स और MH-47 चिनूक हेलीकॉप्टर के जरिए जमीन पर पहुंचकर मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया।
डेल्टा फोर्स को आधिकारिक तौर पर 1st स्पेशल फोर्सेज ऑपरेशनल डिटैचमेंट–डेल्टा कहा जाता है। इसकी स्थापना 1977 में कर्नल चार्ली बेकविथ ने ब्रिटेन की SAS की तर्ज पर की थी। इसका मुख्य उद्देश्य काउंट-टेरेरिज्म मिशन और खतरनाक छापामार ऑपरेशन्स को अंजाम देना है।
क्रूर ट्रेनिंग:
डेल्टा फोर्स में शामिल होने के लिए कमांडो को बेहद कठोर ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है। इसमें 40 मील तक नेविगेशन मार्च, कठिन रास्तों पर भारी सामान के साथ मार्च, एडवांस हथियार प्रशिक्षण और गुप्त मिशनों की ट्रेनिंग शामिल है। अधिकांश उम्मीदवार इस ट्रेनिंग में फेल हो जाते हैं। जो सफल होते हैं, उन्हें छह महीने का ऑपरेटर ट्रेनिंग कोर्स पूरा करना पड़ता है।
ब्लैक हॉक डाउन मिशन:
1993 में सोमालिया की राजधानी मोगादिशु में डेल्टा फोर्स का ऑपरेशन गॉथिक सर्पेंट, जिसे ब्लैक हॉक डाउन के नाम से जाना जाता है, उनका सबसे खतरनाक मिशन माना जाता है। मिशन का उद्देश्य युद्ध सरगना मोहम्मद फराह ऐदीद के दो शीर्ष सहयोगियों को पकड़ना था। हेलीकॉप्टर हमले और घेराबंदी के बावजूद डेल्टा फोर्स के जवानों ने असाधारण साहस दिखाया और घिरे हुए साथियों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस मिशन पर कई फिल्में भी बन चुकी हैं।
डेल्टा फोर्स की हर ऑपरेशन में अद्भुत रणनीति, क्रूर ट्रेनिंग और शांति-काल में भी युद्ध जैसी तैयारी इसे दुनिया की सबसे खतरनाक कमांडो यूनिट बनाती है।