
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सरगर्मी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कल्याण सिंह जयंती कार्यक्रम में शामिल होने के बाद सोमवार को दिल्ली पहुंचे। उनके इस दौरे को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि प्रदेश में जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार के साथ-साथ संगठनात्मक स्तर पर बड़े बदलाव हो सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान प्रदेश की प्रमुख विकास योजनाओं की प्रगति, केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय तथा आगामी राजनीतिक रणनीति पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। नए वर्ष में पूर्ण होने वाली कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट भी मुख्यमंत्री द्वारा प्रधानमंत्री को सौंपे जाने की बात कही जा रही है।
प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री योगी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन से भी मुलाकात कर सकते हैं। इन बैठकों को प्रदेश संगठन और सरकार में संभावित बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा है।
क्यों अहम है यह दौरा
मुख्यमंत्री योगी का यह दिल्ली दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इस समय उत्तर प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री—केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक—भी राजधानी में मौजूद हैं। सोमवार सुबह ब्रजेश पाठक की भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात हो चुकी है। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार और विभागीय फेरबदल को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
फिलहाल यूपी मंत्रिमंडल में कई पद रिक्त हैं। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल करने, कुछ मंत्रियों के विभागों में बदलाव करने और क्षेत्रीय व जातिगत संतुलन साधने को लेकर पार्टी हाईकमान के साथ अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।
संगठनात्मक बदलावों के संकेत
भाजपा नेतृत्व आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठा सकता है। प्रदेश अध्यक्ष पद पर पहले ही पंकज चौधरी की नियुक्ति हो चुकी है। ऐसे में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी की योगी मंत्रिमंडल में वापसी की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। वहीं, कुछ मौजूदा मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाए जाने की भी चर्चाएं हैं।
मिशन 2027 पर फोकस
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन बैठकों के केंद्र में ‘मिशन 2027’ की रणनीति है। सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल, विकास कार्यों की समीक्षा और चुनावी तैयारियों को धार देने पर विशेष जोर दिया जा सकता है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इन मुलाकातों को शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है, लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दिल्ली दौरा उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़े बदलावों का संकेत माना जा रहा है। नए साल की शुरुआत के साथ ही भाजपा के पूरी तरह चुनावी मोड में आने और प्रदेश में सियासी समीकरणों को साधने की तैयारी तेज होने के आसार हैं।