
ऋषिकेश नारायण सिंह, बगहा: बिहार-नेपाल सीमा से सटे पश्चिम चंपारण जिले के वाल्मीकिनगर क्षेत्र के बिसही गांव में रहने वाली जानकी देवी, जिन्हें लोग स्नेह और सम्मान के साथ ‘स्नेक लेडी’ कहते हैं, इलाके में किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। औपचारिक शिक्षा के बिना भी उनका साहस, अनुभव और निस्वार्थ समाजसेवा उन्हें खास पहचान दिलाती है। जानकी देवी का जीवन सिर्फ सांपों को बचाने का नहीं, बल्कि समाज की सेवा करने का है।
किंग कोबरा भी इनसे मांगता है पानी
जानकी देवी का दावा है कि वे कोबरा, किंग कोबरा, अजगर जैसे जहरीले सांपों को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित रूप से पकड़ने में सक्षम हैं। उनके अनुभव के कारण सांप भी उन्हें देखकर शांत हो जाते हैं। अब तक वह हजारों सांपों को रेस्क्यू कर चुकी हैं, और उनमें से कई सांपों को वन विभाग को सौंपा, जबकि कुछ को सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ दिया।
सांप पकड़ने की शुरुआत
जानकी देवी ने महज सात साल की उम्र में सांप पकड़ना शुरू किया था। उनका परिवार भी इस काम से जुड़ा था, जिससे उन्हें बचपन से ही सांपों से निपटने की कला आ गई थी। कोरोना काल में बेटे की मौत ने उन्हें गहरा आघात पहुंचाया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने रास्ते को बदला नहीं और आज भी लोगों की मदद करती हैं।
जहरीले सांप भी इन्हें देख शांत हो जाते हैं
जानकी देवी का कहना है कि अब तक उन्हें 50 से अधिक बार सांप काट चुके हैं, लेकिन कभी भी कोई गंभीर असर नहीं हुआ। कभी हल्का प्रभाव जरूर महसूस हुआ, लेकिन कभी भी डर ने उनके हौसले को तोड़ा नहीं। ग्रामीणों का मानना है कि कई बार सांप भी जानकी देवी को देखकर शांत हो जाते हैं, मानो उन्हें पहचानते हों।
डिस्कवरी चैनल से प्रस्ताव
करीब 15 साल पहले डिस्कवरी चैनल ने जानकी देवी को उनके हुनर के लिए काम का प्रस्ताव दिया था, लेकिन परिवार और गांव की जिम्मेदारियों के कारण उन्होंने इसे ठुकरा दिया। इसके बाद भी वह वन विभाग द्वारा सांप पकड़ने पर रोक लगाए जाने के बावजूद लोगों को सांपों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक कर रही हैं।
प्रसव भी कराती हैं स्नेक लेडी
जानकी देवी केवल सांप पकड़ने में ही नहीं, बल्कि सुरक्षित और सामान्य प्रसव कराने में भी माहिर हैं। आसपास के गांवों से महिलाएं प्रसव के लिए उनके पास आती हैं और जटिल मामलों में भी वह सहजता से सुरक्षित डिलीवरी करा देती हैं। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह किसी भी काम के बदले पैसे नहीं लेतीं। उनका मानना है कि यह हुनर उन्हें समाज की सेवा के लिए मिला है।
जानकी देवी का नाम बगहा से लेकर वाल्मीकिनगर तक आज सम्मान, भरोसे और सेवा की मिसाल बन चुका है। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि साहस, सेवा और निस्वार्थ भाव से की गई मेहनत किसी भी इंसान को महान बना सकती है।