Monday, January 12

DGCA पर नियमों में ढील का आरोप दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस, जवाब तलब

नई दिल्ली।
विमानन सुरक्षा से जुड़े एक अहम मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को नोटिस जारी करते हुए उससे जवाब मांगा है। यह नोटिस फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) और इंडियन पायलट्स गिल्ड की ओर से दायर अवमानना याचिका पर जारी किया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि DGCA ने एयरलाइंस को सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स (CAR) 2024 के तहत लागू होने वाले थकान प्रबंधन और उड़ान-ड्यूटी समय सीमा नियमों में अनुचित छूट दी है।

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मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अमित शर्मा ने DGCA को नोटिस जारी किया और उससे अपना पक्ष रखने को कहा। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई अप्रैल 2026 के लिए निर्धारित की है।

क्या है पूरा मामला
यह विवाद पायलटों की थकान कम करने और उड़ान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए फ्लाइट एंड ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों से जुड़ा है। इन नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पायलट अत्यधिक थकान की स्थिति में उड़ान न भरें, जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर कोई खतरा न आए। यह मामला वर्ष 2012 से दिल्ली हाईकोर्ट में विचाराधीन है, जब भारत के थकान प्रबंधन ढांचे को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप बनाने की मांग उठी थी।

कोर्ट के पहले के निर्देश
फरवरी 2025 में जस्टिस तारा वितस्ता गंजू ने DGCA के एक हलफनामे को रिकॉर्ड पर लिया था, जिसमें संशोधित FDTL व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की समय-सीमा तय की गई थी। इसके तहत 15 प्रावधान 1 जुलाई 2025 तक और शेष सात नियम 1 नवंबर 2025 तक लागू किए जाने थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि संबंधित अधिकारी इन समय-सीमाओं का सख्ती से पालन करेंगे।

इसके बाद अप्रैल 2025 में कोर्ट ने यह दर्ज किया कि CAR 2024 को अधिसूचित करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और एयरलाइंस को तीन सप्ताह के भीतर अपनी थकान प्रबंधन योजनाएं DGCA को सौंपने के निर्देश दिए गए थे।

अवमानना याचिका में क्या आरोप
नवंबर 2025 में FIP ने अवमानना याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि DGCA ने कोर्ट के सामने दिए गए आश्वासनों के विपरीत जाकर एयरलाइंस को नियमों में छूट दी। याचिका में कहा गया कि ऐसी थकान योजनाओं को मंजूरी दी गई जो CAR 2024 के ढांचे और तय समय-सीमा के अनुरूप नहीं थीं।

याचिका में एयर इंडिया, इंडिगो, स्पाइसजेट, अलायंस एयर, अकासा एयर, ब्लू डार्ट एविएशन और क्विकजेट जैसी एयरलाइंस और कार्गो ऑपरेटरों को अक्टूबर 2025 में दी गई छूटों का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि इन छूटों के लिए कोई असाधारण परिस्थिति मौजूद नहीं थी और इससे कॉकपिट की सतर्कता तथा यात्रियों की सुरक्षा से समझौता हुआ।

पायलट यूनियनों का तर्क
पायलट यूनियनों का कहना है कि कोर्ट की निगरानी में DGCA, एयरलाइंस और पायलट संगठनों के बीच कई दौर की बैठकें हुई थीं, जिनमें CAR 2024 के चरणबद्ध क्रियान्वयन पर सहमति बनी थी। इसके बावजूद, DGCA ने कथित तौर पर पायलट संगठनों को सूचित किए बिना और कोर्ट की अनुमति के बिना व्यक्तिगत स्तर पर एयरलाइंस को नियमों में ढील दे दी।

DGCA की सफाई
DGCA की ओर से पेश वकील ने अवमानना के आरोपों का विरोध किया। उनका कहना था कि कोर्ट ने CAR की सामग्री को स्थायी रूप से ‘फ्रीज’ करने का कोई स्पष्ट आदेश नहीं दिया था। नियामक के पास एयरक्राफ्ट एक्ट, 1934 और एयरक्राफ्ट रूल्स के तहत उपयुक्त मामलों में अस्थायी छूट देने की वैधानिक शक्ति है। DGCA ने यह भी कहा कि दी गई छूटें अस्थायी, एयरलाइन-विशिष्ट और नियमित समीक्षा के अधीन थीं।

कोर्ट का रुख
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि यह जांच आवश्यक है कि हलफनामे के बाद दिए गए बदलावों को अवमानना माना जाए या नहीं। इसी आधार पर DGCA को नोटिस जारी कर उससे विस्तृत जवाब मांगा गया है।

यह मामला न केवल नियामक की भूमिका पर सवाल खड़े करता है, बल्कि विमानन सुरक्षा और पायलटों की कार्य-स्थितियों को लेकर भी एक अहम बहस को जन्म देता है।

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