Tuesday, July 21

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हर प्रभात कहता
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हर प्रभात कहता

सद्वार्ता क्षितिज सुनाता रोज़ ही, आशा का संदेश। हर प्रभात कहता उठो, जीवन परम विशेष॥ सूरज चुपके से रचे, नव उजियारा-गान। रातों के हर दर्द का, करता है अवसान॥ लहर-लहर सागर कहे, छोड़ो बीता काल। आगे बढ़ना ही सदा, जीवन की है चाल॥ लाली ओढ़े व्योम ने, लिखा नया अध्याय। अँधियारे के अश्रु से, जन्मा नव पर्याय॥ रेतों के पदचिह्न भी, देते यही पुकार। चलते रहने से सदा, मिलता है संसार॥ थका हुआ हर मन यहाँ, पाए फिर विश्वास। नव किरणों के साथ ही, खिल उठती हर आस॥ कल की हारों का नहीं, रखता सूरज लेख। हर दिन देता रोशनी, मिटा निराशा-रेख॥ भीतर जितना दीप हो, उतना जग उजियार। मन का निर्मल आलोक ही, जीवन का आधार॥ 'सौरभ' हर प्रभात में, ईश्वर का वरदान। उठो, बढ़ो, मुस्काइए, यह जीवन का गान॥ — डॉ. प्रियंका सौरभ   (डॉ. प्रियंका सौरभ, पीएचडी (राजनीति विज्ञान), कवयित...
चेंजिंग रूम में हिडन कैमरे
Natioanal, Opinion

चेंजिंग रूम में हिडन कैमरे

(तकनीक के दुरुपयोग पर कठोर रोक की ज़रूरत)  - डॉ. प्रियंका सौरभ (By Dr. Priyanka Saurabh) (सद्वार्ता) हर सभ्य समाज की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने नागरिकों की गरिमा, निजता और सुरक्षा को कितना महत्व देता है। विशेषकर महिलाओं की निजता की रक्षा किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का मूल दायित्व है। लेकिन जब ऐसे स्थान, जहाँ व्यक्ति स्वयं को सबसे अधिक सुरक्षित समझता है—जैसे चेंजिंग रूम, ट्रायल रूम, फोटो स्टूडियो, जिम, ब्यूटी पार्लर या होटल—वहीं उसकी निजता पर हमला होने लगे, तब यह केवल एक आपराधिक घटना नहीं रहती, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी बन जाती है। हिसार के निरंकारी रोड स्थित एक फोटो स्टूडियो के चेंजिंग रूम में कथित रूप से हिडन कैमरा मिलने की घटना ने हर संवेदनशील नागरिक को झकझोर दिया है। जानकारी के अनुसार, फोटो शूट के लिए पहुँची एक युवती ने चेंजिंग रूम में कपड़े बदलते समय दीवार...
सरकारी स्कूलों में छात्राओं के शौचालयों की कमी पर उठा सवाल, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
Natioanal, Opinion

सरकारी स्कूलों में छात्राओं के शौचालयों की कमी पर उठा सवाल, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

नई दिल्ली। सरकारी विद्यालयों में छात्राओं के लिए बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो और पोस्ट के माध्यम से मोटिवेशनल स्पीकर सोनू शर्मा द्वारा सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। सोशल मीडिया पर साझा किए गए पोस्ट में दावा किया गया है कि नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार देश के लगभग 98,000 सरकारी विद्यालयों में छात्राओं के लिए शौचालय उपलब्ध नहीं हैं। इस दावे के आधार पर शिक्षा व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को लेकर चिंता व्यक्त की गई है। पोस्ट में कहा गया है कि यदि यह स्थिति सही है, तो यह केवल शिक्षा व्यवस्था ही नहीं बल्कि छात्राओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान से जुड़ा गंभीर विषय है, जिस पर सभी सरकारों को प्राथमिकता के आधार पर ध्यान देना चाहिए। इस बीच सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्...
राष्ट्र प्रथम का भाव
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राष्ट्र प्रथम का भाव

हो, यह सच्चा परिवेश।देश-विरोधी सोच से, होता केवल क्लेश॥ मिट्टी जिसकी देह में, बसे श्वास में प्राण।उस भारत पर वार दें, जीवन का सम्मान॥राष्ट्र-भक्ति से ही बने, जन-जन सदा विशेष—देश-विरोधी सोच से, होता केवल क्लेश॥ भाषाएँ हों भिन्न सब, भिन्न रहें परिधान।एक तिरंगा बाँधता, भारत की पहचान॥एकता का दीप ही, करता नव-उन्मेष—देश-विरोधी सोच से, होता केवल क्लेश॥ वीरों के बलिदान का, रखना सदा विचार।उनके कारण ही मिला, स्वतंत्रता का द्वार॥उनकी गौरव-गाथा दे, हमको शुभ संदेश—देश-विरोधी सोच से, होता केवल क्लेश॥ मतभेदों का हो सदा, लोकतांत्रिक मान।किन्तु न टूटे राष्ट्र का, मूल स्वाभिमान॥संविधान की राह से, बढ़े राष्ट्र-परिवेश—देश-विरोधी सोच से, होता केवल क्लेश॥ 'सौरभ' भारत-भूमि से, रखिए सच्चा नेह।राष्ट्र प्रथम का मंत्र ही, जीवन का सद्गेह॥मिलकर गढ़ें भविष्य हम, प्रेम, शांति, परिवेश—राष्ट्र प्रथम का भाव ...
पापा और मैं
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पापा और मैं

पापा संग हर शाम हो,खुशियों की बरसात।उनके संग हर पल लगे,जैसे मीठी बात॥ नन्ही उँगली थामकर,चलता मेरा मान।पापा ही मेरे लिए,पूरे हैं भगवान॥ मासूमी की छाँव में,सपनों का विस्तार।हँसता बचपन बाँटता,जग में प्रेम अपार॥ मीठी बोली, भोला मन,आँखों में अरमान।कल का उजला सूर्य है,मेरा नन्हा प्राण॥ ममता, सीख, विश्वास से,जीवन हो गुलज़ार।संस्कारों की रोशनी,करती बेड़ा पार।। हँसता-गाता यह बचपन,सबसे सुंदर राग।नन्हे मन की हर खुशी,जीवन का सुहाग॥ डॉ. सत्यवान सौरभ (डॉ. सत्यवान सौरभ, पीएचडी (राजनीति विज्ञान), एक कवि और सामाजिक विचारक है।)...
सड़क दुर्घटनाएँ: व्यक्तिगत लापरवाही नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुशासन की चुनौती
Natioanal, Opinion

सड़क दुर्घटनाएँ: व्यक्तिगत लापरवाही नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुशासन की चुनौती

- डॉ. सत्यवान सौरभ भारत आज विश्व में सड़क दुर्घटनाओं से सर्वाधिक प्रभावित देशों में शामिल है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2024 में लगभग 1.77 लाख लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु हुई। यह संख्या किसी प्राकृतिक आपदा या महामारी से कम नहीं है। प्रत्येक दिन सैकड़ों परिवार अपने किसी प्रियजन को खो देते हैं, हजारों लोग स्थायी रूप से दिव्यांग हो जाते हैं और देश को उत्पादक मानव संसाधन तथा अरबों रुपये की आर्थिक क्षति उठानी पड़ती है। इसलिए सड़क दुर्घटनाओं को केवल चालक की लापरवाही, तेज गति या यातायात नियमों के उल्लंघन तक सीमित करके देखना वास्तविक समस्या से आँखें मूँदने जैसा है। यह वस्तुतः सार्वजनिक स्वास्थ्य, सड़क अवसंरचना, कानून प्रवर्तन, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं तथा प्रशासनिक समन्वय की व्यापक विफलता का परिणाम है। सड़क सुरक्षा का प्रश्न सीधे नागरिकों के जीवन के अधिकार से ...
सोनम वांगचुक और सुर्खियों से आगे का सच
Delhi (National Capital Territory), Natioanal, Opinion, State

सोनम वांगचुक और सुर्खियों से आगे का सच

(मीडिया नैरेटिव बनाम जनसमर्थन: क्या किसी आंदोलन की वास्तविक ताकत कैमरों से तय होती है?)  — डॉ. प्रियंका सौरभ लोकतंत्र में किसी भी आंदोलन की सफलता का सबसे बड़ा आधार उसका वास्तविक जनसमर्थन होता है। कैमरों की चमक, सोशल मीडिया की ट्रेंडिंग सूची, यूट्यूब की लाखों व्यूज़ या टीवी चैनलों की लगातार बहसें किसी आंदोलन को चर्चा का विषय तो बना सकती हैं, लेकिन वे स्वयं जनमत का प्रमाण नहीं होतीं। इतिहास गवाह है कि अनेक ऐसे आंदोलन रहे जिन्हें मीडिया ने बहुत कम स्थान दिया, फिर भी वे समाज में व्यापक परिवर्तन का कारण बने। वहीं कुछ ऐसे आंदोलन भी रहे जो मीडिया में छाए रहे, लेकिन समाज में स्थायी आधार नहीं बना सके। पिछले कुछ वर्षों में लद्दाख और वहां के पर्यावरण, संवैधानिक अधिकारों तथा स्थानीय प्रतिनिधित्व को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा हुई है। इस विमर्श में सोनम वांगचुक एक प्रमुख चेहरा बनक...
क्या मध्यप्रदेश की राजनीति में उठ रहे सवाल सत्ता के लिए चुनौती बनेंगे?
Editorial, Madhya Pradesh, Opinion, Politics, State

क्या मध्यप्रदेश की राजनीति में उठ रहे सवाल सत्ता के लिए चुनौती बनेंगे?

संपादकीय मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद प्रदेश की राजनीति लगातार नए घटनाक्रमों और विवादों के केंद्र में रही है। बीते कुछ समय से विभिन्न मामलों में अनियमितताओं और कथित घोटालों के आरोप सामने आ रहे हैं। इन आरोपों ने राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि राज्य में एक के बाद एक ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है। इनमें उज्जैन महाकाल मंदिर से जुड़े ट्रस्ट की भूमि आवंटन प्रक्रिया, कथित अस्पताल संचालन, मेडिकल कॉलेज से जुड़े आरोप, सार्वजनिक वितरण प्रणाली से संबंधित कथित चावल घोटाला तथा अन्य मामलों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है। हालांकि इन मामलों में अंतिम सत्य न्यायिक अथवा सक्षम जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी ...
क्या विजय थलापति भारतीय राजनीति में विपक्ष के नए चेहरे बन सकते हैं?
Editorial, Natioanal, Opinion, Politics, State, Tamil Nadu

क्या विजय थलापति भारतीय राजनीति में विपक्ष के नए चेहरे बन सकते हैं?

संपादकीय दक्षिण भारतीय सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता से राजनेता बने विजय थलापति (थलापति विजय) इन दिनों राजनीति में अपनी सक्रियता और कार्यशैली को लेकर लगातार चर्चा में हैं। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक उनके बयानों, जनसंपर्क अभियानों और सार्वजनिक कार्यक्रमों पर लोगों की नजर बनी हुई है। फिल्मी पर्दे पर नायक की भूमिका निभाने वाले विजय अब वास्तविक राजनीति में भी अपनी अलग पहचान बनाने का प्रयास करते दिखाई दे रहे हैं। पिछले एक दशक में भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर, पश्चिम और पूर्वी भारत के कई राज्यों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की है तथा दक्षिण भारत में भी संगठन के विस्तार के लिए लगातार प्रयास किए हैं। ऐसे राजनीतिक माहौल में विजय का राजनीति में प्रवेश दक्षिण भारत की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय की सबसे बड़ी ताकत उनकी...
क्या अस्पताल उपचार से जुड़ा ऐसा कानून विजय को राष्ट्रीय राजनीति का नया चेहरा बना सकता है?
Opinion, Politics, State, Tamil Nadu

क्या अस्पताल उपचार से जुड़ा ऐसा कानून विजय को राष्ट्रीय राजनीति का नया चेहरा बना सकता है?

हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से वायरल हुआ कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय अस्पतालों से संबंधित ऐसा कानून लाने की तैयारी कर रहे हैं, जिसके तहत यदि उपचार के दौरान किसी मरीज की मृत्यु हो जाती है तो अस्पताल उसके परिजनों से उपचार शुल्क वसूल नहीं कर सकेंगे। हालांकि, इस दावे की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इसे सरकार द्वारा घोषित नीति या पारित कानून नहीं माना जा सकता। इसलिए इस विषय पर चर्चा पूरी तरह एक संभावित राजनीतिक परिदृश्य के रूप में की जानी चाहिए। यदि भविष्य में विजय वास्तव में ऐसा कोई कानून लाते हैं, तो यह केवल स्वास्थ्य व्यवस्था का विषय नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी व्यापक बहस का कारण बन सकता है। आम नागरिक के दृष्टिकोण से अस्पताल का बढ़ता खर्च आज सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है। कई परिवार गंभीर बीमारी के बाद आर्थिक संकट में पहुंच जाते हैं। ऐसे समय...