35 वर्षों बाद पिण्डवाड़ा की पावन धरा पर होगा जैनाचार्य श्री रत्नसेन सूरीश्वरजी म.सा. का मंगल चातुर्मास प्रवेश
पिण्डवाड़ा (भूपेन्द्र परमार)। जैन समाज के लिए अत्यंत हर्ष और गौरव का अवसर है कि लगभग 35 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पूज्य जैनाचार्य श्री रत्नसेन सूरीश्वरजी म.सा. चातुर्मास हेतु अपनी जन्मभूमि पिण्डवाड़ा में मंगल पदार्पण करने जा रहे हैं। उनके आगमन को लेकर सकल जैन संघ एवं श्रद्धालुओं में अपार उत्साह और उल्लास का वातावरण है।
उल्लेखनीय है कि आज से लगभग 35 वर्ष पूर्व आचार्य श्री ने अपने मुनि जीवन के दौरान पिण्डवाड़ा में अविस्मरणीय चातुर्मास किया था। इसके पश्चात उन्होंने गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु सहित देश के विभिन्न राज्यों में व्यापक पदविहार कर जैन धर्म, अहिंसा, संयम एवं आध्यात्मिक मूल्यों का प्रभावी प्रचार-प्रसार किया।
वर्तमान में आचार्य श्री के संयम जीवन स्वीकार का स्वर्णिम वर्ष चल रहा है। संयम जीवन अपनाने के बाद यह उनका 50वाँ चातुर्मास है, जिससे इस वर्ष का चातुर्मास और भी ऐ...









