Sunday, July 26

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हिंदी, मराठी एवं अहिराणी साहित्यकार प्रा. संजय पवार को मानद डॉक्टरेट एवं भारत गौरव पुरस्कार से सम्मानित

पिंपरी चिंचवड़/नासिक। (सद्वार्ता) हिंदी, मराठी एवं अहिराणी भाषा के वरिष्ठ साहित्यकार प्रा. संजय पवार को उनकी साहित्यिक, शैक्षणिक एवं सामाजिक सेवाओं के लिए नासिक में आयोजित एक भव्य समारोह में भारत गौरव पुरस्कार एवं अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय की मानद डॉक्टर ऑफ लिटरेचर (Doctor of Literature) उपाधि से सम्मानित किया गया।

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अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय फेडरेशन की भारतीय इकाई के चेयरमैन डॉ. सच्चिदानंद शांडिल्य ने प्रा. संजय पवार को मानद डॉक्टरेट की उपाधि का प्रमाणपत्र प्रदान किया। वहीं भारत गौरव पुरस्कार का प्रमाणपत्र एवं ट्रॉफी त्र्यंबकेश्वर के श्री महंत सिद्धेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के हाथों प्रदान की गई।

नासिक स्थित होटल रॉयल हेरिटेज के सभागार में आयोजित इस सम्मान समारोह की अध्यक्षता अंतरराष्ट्रीय मानद डॉक्टरेट फेडरेशन के राज्य इकाई अध्यक्ष डॉ. अजीत बागमार ने की। कार्यक्रम में जगद्गुरु द्वाराचार्य डॉ. रामकृष्णदास महाराज लहवितकर एवं त्र्यंबकेश्वर किन्नर अखाड़ा की संस्थापक महामंडलेश्वर पूजामाई नंदगिरि सहित अनेक गणमान्य संत एवं अतिथि उपस्थित रहे।

समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय एवं मौलिक कार्य करने वाले प्रतिभाशाली व्यक्तियों को भी डॉक्टर ऑफ लिटरेचर, महाराष्ट्र गौरव, भारत गौरव एवं विश्व गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

प्रा. संजय पवार ने हिंदी, मराठी एवं अहिराणी भाषा में साहित्य लेखन के क्षेत्र में विशेष योगदान दिया है। उनकी कई पुस्तकें देश-विदेश में प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी कुछ साहित्यिक रचनाओं को विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में भी स्थान प्राप्त हुआ है। साहित्य एवं समाजसेवा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें देश-विदेश में अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।

इस अवसर पर डॉ. सच्चिदानंद शांडिल्य ने मानद डॉक्टरेट उपाधि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में मौलिक योगदान देने वाले विद्वानों एवं सेवाभावी व्यक्तियों का सम्मान किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मानद उपाधि भले ही औपचारिक डिग्री न हो, लेकिन इसके लिए योग्य व्यक्तियों का चयन और सम्मान समाज के लिए प्रेरणादायी होता है।

कार्यक्रम में महामंडलेश्वर पूजामाई नंदगिरि, डॉ. रामकृष्णदास महाराज, महंत सिद्धेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज एवं डॉ. अजीत बागमार ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

सम्मान समारोह के दौरान विरंजय पवार, शशिकांत निकुंभ, डॉ. जसपालसिंह वलवी, मीडिया प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

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