
रायबरेली।
उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के शिवगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत देहली में बुधवार का दिन श्रद्धा, आस्था और उल्लास के उत्सव में बदल गया। मंदिर से चोरी हुई भगवान राधा-कृष्ण की अष्टधातु की मूर्तियों की सुरक्षित बरामदगी के बाद पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों, डीजे, फूल-मालाओं और “राधे-राधे” व “जय श्रीकृष्ण” के गगनभेदी जयकारों के साथ भगवान का भव्य स्वागत किया।
गौरतलब है कि 23 जनवरी की रात देहली गांव स्थित मंदिर से अज्ञात चोरों ने ताला तोड़कर राधा-कृष्ण की बहुमूल्य अष्टधातु की मूर्तियां चोरी कर ली थीं। अगले दिन सुबह मंदिर के पुजारी गंगा प्रसाद पांडे जब पूजा के लिए पहुंचे, तो टूटा ताला और खाली गर्भगृह देखकर स्तब्ध रह गए। घटना की जानकारी फैलते ही गांव में आक्रोश और गहरा दुख व्याप्त हो गया। श्रद्धालुओं की आस्था को गहरी ठेस पहुंची थी।
पुजारी की तहरीर पर शिवगढ़ पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। वहीं, गांव के युवाओं ने भी अपने स्तर पर मूर्तियों की खोज-बीन शुरू कर दी।
बाराबंकी में मिलीं मूर्तियां
बुधवार सुबह सूचना मिली कि चोरी गई मूर्तियां बाराबंकी जिले के लोनी कटरा थाना क्षेत्र के नबीपुर गांव के पास सड़क किनारे रखी हुई मिली हैं। यह खबर मिलते ही देहली गांव में खुशी का माहौल बन गया। लोनी कटरा पुलिस ने मूर्तियों को कब्जे में लेकर शिवगढ़ पुलिस को सौंप दिया।
जांच के दौरान पुष्टि हुई कि मूर्तियां पीतल और कांसे की मिश्रित धातु से निर्मित हैं। इसके बाद श्रद्धालुओं की मौजूदगी में शिवगढ़ पुलिस ने मूर्तियां विधिवत मंदिर के पुजारी को सौंप दीं।
जयकारों के साथ गांव में प्रवेश
मूर्तियों की वापसी पर भवानीगढ़ चौराहे से डीजे के साथ धार्मिक जुलूस निकाला गया। फूलों से सजी पालकी में विराजमान राधा-कृष्ण की मूर्तियां जब गांव में पहुंचीं, तो हर ओर भक्तिमय वातावरण छा गया। ग्रामीणों ने इसे प्रभु की कृपा और चमत्कार बताया।
बदले वस्त्र बने चर्चा का विषय
ग्रामीणों के बीच सबसे अधिक चर्चा का विषय मूर्तियों के बदले हुए वस्त्र रहे। चोरी के समय राधा-कृष्ण के वस्त्र लाल रंग के थे, जबकि बरामदगी के समय वे रेडियम जैसे हल्के हरे रंग के पाए गए। इसे लेकर गांव में तरह-तरह की धार्मिक और आस्था से जुड़ी चर्चाएं हो रही हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि हर वर्ष होली के दूसरे दिन मूर्तियों को पालकी में रखकर पूरे गांव में भ्रमण कराया जाता है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2013 में भी यही मूर्तियां चोरी हुई थीं, जो करीब 14 महीने बाद सुरक्षित मिली थीं। दूसरी बार भी मूर्तियों की सकुशल वापसी से लोगों की आस्था और विश्वास और अधिक प्रगाढ़ हो गया है।
पुलिस का बयान
शिवगढ़ थाना प्रभारी राजीव सिंह ने बताया कि मूर्तियों की पूरी जांच कराई गई है। दोनों मूर्तियां पीतल और कांसे की मिश्रित धातु से बनी हैं और इन्हें मंदिर के पुजारी को सौंप दिया गया है। विधि-विधान से पूजा-पाठ के बाद मूर्तियों की पुनः स्थापना की जाएगी।