
नई दिल्ली: आने वाले समय में रेलवे की परियोजनाओं में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ सकती है। सार्वजनिक परियोजनाओं को मंजूरी देने वाले पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (PIB) ने रेलवे को कई मोर्चों पर प्राइवेट कंपनियों की मदद लेने की सलाह दी है। इसमें मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स, ट्रेन, वैगन और लोकोमोटिव की खरीद शामिल हैं।
सरकारी समिति ने सुझाव दिया है कि ‘वेट लीज’, ‘हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल’ (HAM) और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP)’ जैसे तरीके अपनाकर रेलवे अपने रोलिंग स्टॉक की खरीद और संचालन में प्राइवेट निवेशकों को शामिल करे।
वेट लीज और HAM मॉडल क्या हैं?
वेट लीज: नई लीजिंग कंपनी रोलिंग स्टॉक और उसे चलाने वाले क्रू को लीज पर देगी।
HAM मॉडल: इस मॉडल में सरकार प्रोजेक्ट बनाने के दौरान कुल लागत का 60% निजी कंपनियों को देती है और बाकी 40% किश्तों में भुगतान किया जाता है।
PIB ने रेलवे को नीति आयोग और आर्थिक मामलों के विभाग के साथ मिलकर ‘मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट’ तैयार करने की सलाह दी है। रेलवे के अधिकारियों के अनुसार, सड़क और बिजली जैसे क्षेत्रों की तुलना में रेलवे प्रोजेक्ट्स में PPP लागू करना कठिन है, लेकिन HAM मॉडल सबसे बेहतर विकल्प हो सकता है।
कोयले पर निर्भरता और नेट जीरो लक्ष्य
PIB ने चेतावनी दी है कि रेलवे की आय कोयले की ढुलाई पर अत्यधिक निर्भर है। सरकार ने 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है, जिससे थर्मल पावर प्लांटों में कोयले की मांग कम हो सकती है। इससे रेलवे के लंबी अवधि के ट्रैफिक अनुमान प्रभावित होंगे।
लास्ट माइल कनेक्टिविटी पर ध्यान
समिति ने कहा है कि लास्ट माइल कनेक्टिविटी का काम मुख्य रूप से सड़क मार्ग से किया जाना चाहिए, न कि रेल मार्ग से। रेलवे को जरूरत पड़ने पर नेटवर्क विस्तार योजनाओं में बदलाव करने की सलाह भी दी गई है।