Thursday, January 8

राजस्थान में मिड डे मील योजना में 2000 करोड़ से अधिक का घोटाला, एसीबी ने दर्ज किया मामला

 

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जयपुर (संब्रत चतुर्वेदी/रामस्वरूप लामरोड़): राजस्थान में मिड डे मील योजना में 2000 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का मामला सामने आया है। शिकायत मिलने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने जांच की और भारी अनियमितताएं पाए जाने पर कॉनफैड (CONFED) के अधिकारियों और निजी फर्मों के खिलाफ केस दर्ज किया।

 

एसीबी के डीजी गोविंद गुप्ता ने बताया कि मिड डे मील योजना के तहत स्कूलों में कॉनफैड के माध्यम से विभिन्न फर्मों द्वारा खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। जांच में सामने आया कि कोविड काल के दौरान, स्कूलें बंद रहने के बावजूद, योजना में बड़ा घोटाला हुआ। स्कूली विद्यार्थियों को खाद्यान्न देने के लिए दाल, तेल, मसाले आदि से युक्त कॉम्बो पैक आपूर्ति करने का दावा किया गया, लेकिन वास्तविक क्रियान्वयन में भारी अनियमितताएं हुईं।

 

आरोपियों में शामिल:

एसीबी ने कॉनफैड के मैनेजर और अधिकारियों के अलावा निजी फर्म संचालकों को भी आरोपी बनाया है। इनमें कॉनफैड के सहायक लेखाधिकारी सांवतराम, प्रबंधक (नागरिक आपूर्ति) राजेन्द्र और लोकेश कुमार बापना, सहायक प्रबंधक प्रतिभा सैनी, प्रबंधक (आयोजना) योगेन्द्र शर्मा, प्रबंधक राजेन्द्र सिंह शेखावत, गोदाम कीपर रामधन बैरवा, सुपरवाइजर दिनेश कुमार शर्मा, केन्द्रीय भण्डार के रीजनल मैनेजर शैलेश सक्सैना, डिप्टी मैनेजर बी.सी. जोशी, सहायक मैनेजर चंदन सिंह के अलावा मैसर्स तिरुपति सप्लायर्स, मैसर्स जागृत एंटरप्राइजेज, मैसर्स एमटी एंटरप्राइजेज और मैसर्स साई ट्रेडिंग जैसी फर्में शामिल हैं।

 

षड्यंत्रपूर्वक नियम बदले गए:

एसीबी की जांच में यह भी सामने आया कि योजना से जुड़े अधिकारियों और कॉनफैड के अधिकारियों ने आपसी मिलीभगत से पात्र फर्मों को टेंडर से बाहर कर अपनी चहेती फर्मों को लाभ पहुंचाया। टेंडर लेने वाली फर्मों ने इसे अवैध रूप से सबलेट किया और फर्जी आपूर्तिकर्ताओं एवं ट्रांसपोर्टरों का संगठित नेटवर्क तैयार किया।

 

एसीबी अब सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की तैयारी में है और जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी।

 

 

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