Monday, May 25

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छपरा के बाद नवादा में ‘मौत का धुआं’ अलाव की गैस से बुझ गई दो पीढ़ियों की सांसें, नाना-नाती की मौत

 

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बिहार में ठंड से बचने के लिए जलाया गया अलाव एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ है। छपरा की दर्दनाक घटना के बाद अब नवादा जिले से भी ऐसा ही हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहां बंद कमरे में जलाई गई बोरसी (अलाव) की जहरीली गैस से दम घुटने के कारण नाना और उनके मासूम नाती की मौत हो गई। इस हादसे में परिवार के तीन अन्य सदस्य गंभीर रूप से बीमार हो गए हैं, जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है।

 

यह घटना मुफस्सिल थाना क्षेत्र के त्रिलोकी बीघा गांव की है। शनिवार रात परिवार के पांच सदस्य एक ही कमरे में सो रहे थे। ठंड से बचाव के लिए कमरे में बोरसी जलाई गई थी, लेकिन खिड़की-दरवाजे बंद होने के कारण कमरे में कार्बन मोनोऑक्साइड गैस भर गई। ऑक्सीजन की कमी से सभी लोग धीरे-धीरे बेहोश हो गए।

 

सुबह काफी देर तक जब कमरे का दरवाजा नहीं खुला तो परिजनों को अनहोनी की आशंका हुई। दरवाजा तोड़कर देखा गया तो अंदर का मंजर रूह कंपा देने वाला था—सभी पांचों लोग बेसुध हालत में फर्श पर पड़े थे। आनन-फानन में उन्हें पावापुरी मेडिकल अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान 50 वर्षीय श्री यादव और उनके महज एक वर्षीय नाती आशीष कुमार ने दम तोड़ दिया।

 

वहीं श्री यादव की पत्नी सरो देवी, बेटी इंदु देवी और नतनी सपना कुमारी की हालत गंभीर बनी हुई है। डॉक्टरों के अनुसार जहरीली गैस के लंबे समय तक संपर्क में रहने के कारण उनकी स्थिति नाजुक है।

 

परिजनों ने बताया कि इंदु देवी का हाल ही में ऑपरेशन हुआ था, जिस कारण वह मायके आई हुई थीं। परिवार की सुरक्षा के लिए जलाया गया अलाव ही इस दुखद हादसे का कारण बन गया।

 

पुलिस ने दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। हर आंख नम है और हर जुबान पर एक ही सवाल—आखिर कब लोग अलाव के इस जानलेवा खतरे के प्रति जागरूक होंगे?

 

यह हादसा एक बार फिर चेतावनी है कि बंद कमरे में अलाव या कोयला जलाना जान के लिए बेहद खतरनाक है। ठंड से बचाव जरूरी है, लेकिन सावधानी उससे भी ज्यादा जरूरी।

 

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