10वें नंबर का बल्लेबाज बीमारी के कारण बना ओपनर, भारत के खिलाफ खेली सबसे बड़ी पारी


नई दिल्ली. आपने शायद ही कभी ये सुना हो कि किसी क्रिकेटर ने अपना फर्स्ट क्लास करियर 10वें नंबर पर बल्लेबाजी करते शुरू किया हो. लेकिन आगे चलकर वो देश के लिए टेस्ट में बतौर ओपनर खेला. ये करिश्मा न्यूजीलैंड के मार्क रिचर्ड्सन ने किया था. आज उनका 50वां (11 जून, 1971) जन्मदिन है. रिचर्ड्सन ने ऑकलैंड के लिए जब फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेलना शुरू किया था. तब वो बाएं cहाथ के स्पिन गेंदबाज होने के साथ ही दसवें नंबर पर बल्लेबाजी करते थे. लेकिन एक बीमारी की वजह से उन्होंने अपना ध्यान गेंदबाजी से हटाकर बल्लेबाजी पर लगा लिया और आगे चलकर वो टेस्ट क्रिकेट में न्यूजीलैंड के लिए ओपनिंग करने लगे.

रिचर्ड्सन ने जब न्यूजीलैंड के लिए टेस्ट डेब्यू किया, तब उनकी उम्र 30 साल थी और 34 साल की उम्र में उन्होंने अपने देश के लिए आखिरी टेस्ट खेला. यानी सिर्फ 4 साल ही वो टेस्ट क्रिकेट खेले. वो फिलहाल स्काय स्पोर्ट्स न्यूजीलैंड के लिए कॉमेंट्री करते हैं. हालांकि, इन चार सालों में भी उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से सबको प्रभावित किया. उन्होंने न्यूजीलैंड के लिए 38 टेस्ट में करीब 45 के औसत से 2776 रन बनाए. वहीं, इस बल्लेबाज ने 4 वनडे में 42 रन जोड़े.

रिचर्ड्सन ने पाकिस्तान के खिलाफ पहला टेस्ट शतक ठोका

रिचर्ड्सन ने साल 2000 में जिम्बाब्वे के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था. पहले मैच में वो 19 रन बनाकर आउट हो गए. लेकिन हरारे में हुए दूसरे टेस्ट में वो एक रन से शतक चूक गए. इसके बाद वो लगातार अर्धशतक जमाते रहे. लेकिन शतक से महरूरम रहे. हालांकि, 6 टेस्ट बाद उनकी मुराद पूरी हुई और 2001 में इस बल्लेबाज ने पाकिस्तान के खिलाफ हेमिल्टन टेस्ट में अपना पहला टेस्ट शतक लगाया.रिचर्ड्सन ने भारत के खिलाफ टेस्ट में सबसे बड़ा स्कोर बनाया

रिचर्ड्सन ने इसके बाद तीन और शतक लगाए. एक बांग्लादेश, एक भारत और एक इंग्लैंड के खिलाफ. उन्होंने टेस्ट में सबसे बड़ी 145 रन की पारी भारत के खिलाफ 2003 के मोहाली टेस्ट में खेली थी. इस टेस्ट में न्यूजीलैंड के तीन और बल्लेबाजों ने लू विसेंट(106), स्कॉट स्टाइरिस(119) और क्रैग मैकमिलन(100) रन की पारी खेली थी. तब न्यूजीलैंड ने 6 विकेट के नुकसान पर 630 रन पर पारी घोषित की थी. ये विदेश में टीम का दूसरा सबसे बड़ा स्कोर है.

ब्रैडमैन से है रिचर्ड्सन का खास कनेक्शन

रिचर्ड्सन कई बार मजाक में अपने करियर की उपलब्धियों का बखान करते थे और ऐसा करते समय में वो दिग्गज खिलाड़ियों से अपनी तुलना भी करते थे. उनका ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज बल्लेबाज डॉन ब्रैडमैन से भी खास कनेक्शन था. इस कीवी बल्लेबाज ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 157 मैच में 9994 रन बनाए. जोकि ब्रैडमैन के टेस्ट औसत से सिर्फ दशमलव भर के अंतर से अलग है. ब्रैडमैन ने 52 टेस्ट में 6996 रन बनाए थे और उनका औसत 99.94 का था.

इसके अलावा उनका अपने देश के महानतम ऑलराउंडर रिचर्ड हेडली से भी खास नाता था. दरअसल, रिचर्ड्सन ने अपने 38 टेस्ट लंबे करियर में 21 के औसत से एक विकेट लिया, जोकि हे़डली के 22.29 के करियर औसत से बेहतर था. ये अलग बात है कि हेडली ने रिचर्ड्सन के मुकाबले टेस्ट में 431 विकेट हासिल किए थे.

वॉर्न को टेस्ट में शतक नहीं बनाने दिया

इसके अलावा उन्होंने शेन वॉर्न को भी टेस्ट में शतक बनाने से रोका था. दरअसल, साल 2000 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी टेस्ट में वॉर्न 99 रन पर खेल रहे थे. उन्होंने डेनिएल विटोरी की गेंद पर स्लॉग स्वीप किया और रिचर्ड्सन ने कैच लपक लिया. ये टेस्ट करियर में वॉर्न का सबसे बड़ा स्कोर रहा. वो फिर कभी इस आंकड़े के पार नहीं जा पाए.

रिचर्ड्सन का अंदाज बिल्कुल जुदा था. वो जब भी किसी देश का दौरा करते तो उसके खत्म होने के बाद विपक्षी टीम के सबसे धीमे दौड़ने वाले खिलाड़ी को रेसिंग की चुनौती देते थे. उन्होंने पाकिस्तान के दानिश कनेरिया, दक्षिण अफ्रीका के निल मकेंजी और इंग्लैंड के एश्ले जाइल्स को ये चुनौती दी थी. वो सिर्फ कनेरिया को ही रेस में हरा पाए.





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