Friday, May 15

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जीडीपी तेज रफ्तार में, लेकिन औद्योगिक उत्पादन फिसला — 13 महीनों का सबसे निचला स्तर, जानें क्या है वजह

नई दिल्ली: देश की अर्थव्यवस्था जहाँ दूसरी तिमाही में 8.2% की दमदार जीडीपी ग्रोथ दर्ज कर रही है, वहीं अक्टूबर में औद्योगिक उत्पादन (IIP) की रफ्तार काफी कमजोर पड़ी है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में सिर्फ 0.4% की बढ़ोतरी हुई है—यह 13 महीनों का सबसे निचला स्तर है। पिछले साल अक्टूबर में ग्रोथ 3.7% और इस साल सितंबर में 4.6% रही थी।

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मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और पावर सेक्टर ने किया निराश

अक्टूबर महीने में कई प्रमुख सेक्टरों में सुस्ती देखने को मिली—

  • मैन्युफैक्चरिंग : वृद्धि घटकर 1.8% रह गई, जबकि पिछले साल यह 4.4% थी
  • माइनिंग उत्पादन : 1.8% की गिरावट दर्ज, पिछले साल 0.9% की वृद्धि
  • बिजली उत्पादन : 6.9% की बड़ी गिरावट, जबकि एक वर्ष पहले 2% की ग्रोथ

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (टीवी, फ्रिज आदि) की ग्रोथ -0.5% और नॉन-ड्यूरेबल्स की -4.4% रही। पूरे वित्त वर्ष में अक्टूबर तक औद्योगिक उत्पादन की औसत वृद्धि सिर्फ 2.7% रही, जो पिछले वर्ष 4% थी।

बारिश और त्योहारों के चलते उत्पादन प्रभावित: विशेषज्ञ

बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकनॉमिस्ट मदन सवनवीस ने बताया कि—

  • लंबे समय तक खिंचे मॉनसून ने माइनिंग और पावर सेक्टर को प्रभावित किया
  • अक्टूबर में त्योहारी सीजन के कारण वर्किंग डेज कम रहे
  • तीसरी तिमाही उद्योग जगत के लिए अहम होगी, क्योंकि GST में कमी और इनकम टैक्स रेट्स में राहत से खपत बढ़ने की उम्मीद है

मैन्युफैक्चरिंग PMI भी नीचे आया

HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI अक्टूबर के 59.2 से गिरकर नवंबर में 55.6 पर आ गया — यह फरवरी के बाद सुधार की सबसे धीमी रफ्तार है। रिपोर्ट में कहा गया कि सेल्स और प्रोडक्शन में सुस्त बढ़ोतरी इसका कारण रही।

HSBC की चीफ इंडिया इकनॉमिस्ट प्रांजल भंडारी ने स्पष्ट किया कि—

  • अमेरिकी टैरिफ का असर भारतीय मैन्युफैक्चरिंग पर दिख रहा है
  • नए एक्सपोर्ट ऑर्डर 13 महीनों के निचले स्तर पर पहुँच गए हैं

तेजी से बढ़ती जीडीपी के बीच IIP की सुस्ती — किस दिशा में जा रही है अर्थव्यवस्था?

एक तरफ जीडीपी का शानदार प्रदर्शन है, दूसरी तरफ औद्योगिक उत्पादन की घटती गति चिंता बढ़ाती है। आने वाली तिमाही में खपत और निर्यात से जुड़े संकेतक तय करेंगे कि औद्योगिक मोर्चे पर स्थिति कितनी सुधरती है।

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