
रांची (झारखंड) – वित्त वर्ष 2026-27 के लिए झारखंड सरकार ने 1,58,560 करोड़ रुपए का बजट पेश किया है। इसे राज्य के सर्वांगीण विकास और जन-हितैषी कदम के रूप में पेश किया गया है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विधानसभा में इसे ‘अबुआ दिशोम बजट’ नाम दिया और कहा कि यह गरीबों के आंसू पोंछने और आम जनता के चेहरे पर मुस्कान लाने वाला साबित होगा।
बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि इसमें राज्य के शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, अवसंरचना, ऊर्जा और युवाओं के सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है।
बजट की मुख्य विशेषताएँ
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अबुआ आवास योजना: राज्य के बेघर और असुरक्षित मकानों में रहने वाले परिवारों के लिए प्रावधान।
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मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना: महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए बजट आवंटन।
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झारखंड कृषि ऋण माफी योजना: किसानों को राहत देने और योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर।
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सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस: राज्य में 100 नए उत्कृष्ट विद्यालय संचालित करने का लक्ष्य।
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बालिका आवासीय विद्यालय: पलामू, लातेहार, गढ़वा और धनबाद में नए स्कूल।
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महिला किसान योजना: महिलाओं को आधुनिक खेती और बाजार से जोड़ने के लिए 25 करोड़ रुपए का प्रावधान।
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मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना: युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए योजना का विस्तार।
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PESA नियमावली लागू: ग्राम सभाओं को बालू घाटों के प्रबंधन और स्थानीय विकास में भूमिका।
बजट में पारदर्शिता और जवाबदेही
इस बार बजट के साथ आउटकम बजट, जेंडर बजट और चाइल्ड बजट भी सदन में पेश किए गए। इन दस्तावेजों में विभागवार लक्ष्यों, खर्च की प्रभावशीलता और सामाजिक प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण शामिल है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के संसाधनों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
वित्त मंत्री के विचार
राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि बजट में युवाओं और महिलाओं के लिए समर्पित योजनाओं पर विशेष जोर है। पिछले साल के 1.45 लाख करोड़ रुपए के बजट की तुलना में इस बार यह लगभग 7-10 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार से 11,000 करोड़ रुपए की अनुदान राशि नहीं मिली, फिर भी राज्य ने विकास के लिए मजबूती से कदम उठाए हैं।
निष्कर्ष
इस बजट को झारखंड की सामाजिक और आर्थिक कायाकल्प यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सदन में बजट पर बहस और समीक्षा के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।
