
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया। इसके तुरंत बाद ट्रंप ने पहले 10% और फिर 15% टैरिफ लागू कर दिया। इस कदम के बाद यूरोपीय संघ (EU) ने साफ शब्दों में कहा कि वह टैरिफ में किसी भी वृद्धि को स्वीकार नहीं करेगा।
यूरोपीय आयोग का सख्त रुख
यूरोपीय आयोग ने कहा कि यह स्थिति निष्पक्ष, संतुलित और आपसी लाभ वाले ट्रांसअटलांटिक व्यापार के लिए ठीक नहीं है। आयोग ने जोर देकर कहा कि एक सौदा, सौदा ही होता है। पिछले साल हुए ईयू-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत अमेरिका को इस बात की पूरी जानकारी देनी होगी कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वह कौन से कदम उठाएगा। आयोग ने यह भी चेतावनी दी कि अप्रत्याशित टैरिफ वैश्विक बाजार में विश्वास को कमजोर करते हैं और व्यापार को बाधित करते हैं।
कितना है ईयू पर टैरिफ?
पिछले साल के समझौते के अनुसार, अधिकांश ईयू उत्पादों पर 15% अमेरिकी टैरिफ तय किया गया था। हालांकि, स्टील और विमानों के पुर्जों जैसे कुछ खास उत्पादों पर अलग दरें थीं। इस समझौते में ईयू ने कई अमेरिकी उत्पादों पर आयात शुल्क हटाने की अनुमति दी थी और अधिक शुल्क लगाने की धमकी वापस ली थी।
भारत ने क्या कदम उठाया?
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले और ट्रंप के नए 15% टैरिफ के बाद भारत-अमेरिका के बीच 23 फरवरी को वॉशिंगटन में होने वाली व्यापार वार्ता टाल दी गई। यह मीटिंग अंतरिम व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए तय थी। ट्रंप के टैरिफ बढ़ाने से भारत पर कुल टैरिफ का बोझ लगभग 18.4% हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से वैश्विक व्यापार और भारत के निर्यात पर असर पड़ सकता है। भारत ने अमेरिका के साथ बातचीत को पुनः शेड्यूल कर इसे हल करने की रणनीति बनाई है।
