Thursday, February 19

विधायकों का फोन नहीं उठाया तो कमांड सेंटर से जाएगा अलर्ट, ‘संवाद सेतु’ एप से बनेगा सीधा संपर्क

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों के फोन कॉल न उठाने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। हाल ही में यह मुद्दा विधानसभा में जोर-शोर से उठाए जाने के बाद सरकार ने अब इस पर सख्त कदम उठाने की तैयारी कर ली है। सरकार ने निर्णय लिया है कि यदि कोई अधिकारी विधायक या जनप्रतिनिधि का फोन समय पर रिसीव नहीं करता है, तो कमांड सेंटर से तत्काल अलर्ट जारी किया जाएगा।

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इस नई व्यवस्था के तहत जनप्रतिनिधियों की शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के लिए सरकार ‘संवाद सेतु’ एप (Samvad Setu App) विकसित कर रही है, जिसके माध्यम से अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद को मजबूत किया जाएगा।

10 मिनट में कॉल बैक करना होगा अनिवार्य

नई व्यवस्था के अनुसार यदि किसी जनप्रतिनिधि द्वारा किसी अधिकारी को कॉल किया जाता है, तो अधिकारी को कॉल रिसीव करना अनिवार्य होगा। यदि किसी कारणवश अधिकारी कॉल नहीं उठा पाता है, तो उसे 10 मिनट के भीतर कॉल बैक कर संवाद करना होगा।

यदि अधिकारी 10 मिनट के भीतर कॉल बैक नहीं करता है, तो कमांड सेंटर द्वारा तुरंत अलर्ट भेजा जाएगा और अधिकारी को तत्काल संपर्क स्थापित करना होगा।

25 फरवरी से तीन जिलों में पायलट प्रोजेक्ट

समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने ‘संवाद सेतु’ एप को तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
उन्होंने बताया कि यह एप 25 फरवरी से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में तीन जिलों—हरदोई, गाजियाबाद और कन्नौज—में लागू किया जाएगा।

यह सुविधा केवल अधिकारियों के सीयूजी (CUG) नंबरों पर ही लागू होगी। जनप्रतिनिधियों को अधिकारियों के सीयूजी नंबर पर ही कॉल करना होगा।

सरकार ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी स्थिति में मोबाइल फोन बंद न रखें और जनप्रतिनिधियों के कॉल को गंभीरता से लें।

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना का सख्त संदेश

इस मामले पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि जनप्रतिनिधियों का सम्मान करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को विधायकों के फोन कॉल रिसीव कर उचित जवाब देना चाहिए।

विधानसभा अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि विधायकों के आदेशों का अनुपालन नहीं किया गया या जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा की गई, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

यह फैसला नियम-300 के तहत विधानसभा में दी गई सूचना के आधार पर सुनाया गया।

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