
चंडीगढ़, 14 फरवरी 2026: हरियाणा के कैथल में शुक्रवार को एक अनोखा दृश्य देखने को मिला, जब राज्य के ऊर्जा, परिवहन और श्रम मंत्री अनिल विज और जिले की पुलिस अधीक्षक उपासना सिंह के बीच तीखी बहस हुई। यह बहस उस समय शुरू हुई जब एक पुलिसकर्मी के निलंबन को लेकर मंत्री ने एसपी को निर्देश दिया, जिसे लेकर उपासना सिंह ने अपनी स्थिति स्पष्ट की।
बैठक के दौरान अनिल विज ने कहा कि उन्होंने जमीन से जुड़े एक मामले में सहायक उपनिरीक्षक संदीप को निलंबित करने का आदेश दिया है। हालांकि, एसपी उपासना ने जवाब दिया कि संबंधित एएसआई करनाल जिले का है, इसलिए निलंबन का अधिकार उनके पास नहीं है। मंत्री ने फिर कहा कि वह डीजीपी को पत्र लिखने का निर्देश दें, ताकि निलंबन लागू किया जा सके।
बैठक में मौजूद लोग और मीडिया कर्मी भी इस बहस के गवाह बने। मंत्री ने कहा, “मेरा आदेश पूरे हरियाणा में चलता है।” वहीं उपासना ने साफ किया कि वह आदेश तो लिख सकती हैं, लेकिन लागू नहीं कर सकती।
निलंबन का मामला क्या है?
जांच में पता चला कि एएसआई संदीप ने जमीन के सौदे में खरीदार से 7 लाख रुपये अग्रिम राशि ली, लेकिन दस्तावेजों में गड़बड़ी होने के कारण खरीदार ने पैसे वापस मांगे। संदीप ने पैसे लौटाने से इनकार किया और मामले को करनाल के आर्थिक प्रकोष्ठ में स्थानांतरित कराने की कोशिश की। इस विवाद के बाद निलंबन की प्रक्रिया शुरू हुई।
उपासना सिंह – मेधावी आईपीएस अधिकारी
उपासना सिंह 2017 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं और हरियाणा के रेवाड़ी जिले के गांव नांगल मूंदी की निवासी हैं। उन्होंने हैदराबाद में सिविल सर्विसेज के फाउंडेशन कोर्स पूरा किया और होम कैडर प्राप्त किया।
उपासना ने 2017 के यूपीएससी एग्ज़ाम में 596वीं रैंक हासिल की थी, वहीं ओबीसी कैटेगरी में 95वीं रैंक थी। उनकी पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन रहा; उन्होंने आईआईटीएन से शिक्षा प्राप्त की और मैट्रिक में हरियाणा में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
उपासना का परिवार भी शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में सक्रिय है। उनके पिता शिक्षक हैं, बड़ी बहन नम्रता सिंह रेडियोलॉजिस्ट हैं और भाई दीपक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
ज्वलंत बहस और अनुशासन के प्रति उनकी स्पष्ट दृष्टि के कारण उपासना सिंह इस समय चर्चा में हैं। उनकी स्पष्टता और कानून के प्रति प्रतिबद्धता ने उन्हें राज्य में एक प्रतिष्ठित आईपीएस अधिकारी के रूप में स्थापित किया है।
