
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी होने के बावजूद आरोपित की गिरफ्तारी नहीं होने पर पुलिस प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इस प्रकार की लापरवाही से जनता का न्यायपालिका पर भरोसा कमजोर होता है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पुलिस अदालत को हल्के में न ले और कानून के पालन में कोई कोताही न बरते।
सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा—
“यह कानून का न्यायालय है। हमें अदालत की कार्यप्रणाली की पूरी समझ है। पुलिस अदालत को हल्के में न ले। हमसे खेल मत खेलिए और जनता का भरोसा मत तोड़िए।”
खंडपीठ ने जताई पुलिस-आरोपित मिलीभगत की आशंका
यह मामला वर्ष 2019 की एक आपराधिक अपील से संबंधित है, जिसमें हत्या के दोषी के खिलाफ जारी NBW लंबे समय से निष्पादित नहीं किया गया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति सत्यचीर सिंह की खंडपीठ कर रही थी। अदालत ने यह भी आशंका जताई कि पुलिस के कुछ अधीनस्थ अधिकारियों और आरोपित के बीच मिलीभगत हो सकती है, जिसके कारण वारंट पर कार्रवाई नहीं की गई।
रिपोर्ट और हलफनामे में विरोधाभास पर कोर्ट नाराज
सुनवाई के दौरान पुलिस की रिपोर्ट और आरोपित द्वारा दाखिल हलफनामे में बड़ा विरोधाभास सामने आया। पुलिस ने दावा किया कि आरोपित का पता सत्यापित नहीं हो सका, जबकि आरोपित ने कहा कि पुलिस उसके घर आई थी और उसे वारंट की जानकारी भी दी थी। इसी विरोधाभास को लेकर अदालत ने नाराजगी जाहिर की और पुलिस की नीयत पर सवाल उठाए।
पुलिस अधिकारियों को तलब, प्रतिनिधि भेजने पर आपत्ति
हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए गौतम बुद्ध नगर के पुलिस आयुक्त तथा हापुड़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया था। सुनवाई में एसएसपी हापुड़ और डीसीपी गौतम बुद्ध नगर व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए, जबकि पुलिस आयुक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।
कोर्ट ने प्रतिनिधि भेजने पर आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया कि वह किसी प्रतिनिधि को नहीं सुनेगा और संबंधित अधिकारी स्वयं उपस्थित हों।
विभागीय कार्रवाई शुरू, पुलिसकर्मी निलंबित
राज्य सरकार की ओर से पेश अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने अदालत को बताया कि मामले में जिम्मेदार कांस्टेबल, उपनिरीक्षक समेत अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच प्रारंभ कर दी गई है। सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया कि आगे से NBW के निष्पादन में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होने दी जाएगी।
अगली सुनवाई 23 मार्च को
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 23 मार्च निर्धारित की है। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भविष्य में अदालत के आदेशों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
