
नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ मोबाइल और कंप्यूटर तक सीमित नहीं रहा। यह सीधे आम लोगों की जेब, सेहत और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगा है। हाल ही में GPT-5 नाम के अडवांस AI सिस्टम ने एक ऐसी खोज की है, जिससे दवाइयों, मेडिकल टेस्ट, खेती और कई जरूरी चीजों की लागत कम हो सकती है।
GPT-5 ने प्रोटीन बनाने की महंगी प्रक्रिया को काफी सस्ता कर दिया है। आमतौर पर लोग प्रोटीन को सिर्फ जिम या सप्लीमेंट से जोड़कर देखते हैं, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा है।
कहाँ-कहाँ इस्तेमाल होता है प्रोटीन
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दवाइयों में: डायबिटीज के लिए इंसुलिन, कैंसर की दवाइयां, कोविड जैसे रोगों की दवा।
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मेडिकल जांच: डायग्नोस्टिक किट और लैब टेस्ट।
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खेती में: एंजाइम और कृषि संबंधी उत्पाद।
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इंडस्ट्री में: कपड़े धोने वाले डिटर्जेंट और अन्य उद्योगिक प्रक्रियाएं।
इसका मतलब साफ है, जब प्रोटीन सस्ते होंगे, तो इन सब चीज़ों की कीमत भी कम हो सकती है।
GPT-5 ने कैसे घटाई लागत
GPT-5 ने Ginkgo Bioworks कंपनी के साथ मिलकर सेल-फ्री प्रोटीन सिंथेसिस (CFPS) तकनीक को किफायती बनाया। इस नई प्रक्रिया से:
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प्रोटीन बनाने की कुल लागत लगभग 40% तक कम हुई।
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इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स की कीमत में 57% तक की गिरावट आई।
CFPS तकनीक में अब जीवित कोशिकाओं को उगाने की बजाय सीधे प्रोटीन बनाने वाली मशीनरी का इस्तेमाल किया जाता है। GPT-5 ने केवल 3 राउंड में यह समाधान खोज लिया। AI ने कंप्यूटर, ब्राउजर और रिसर्च पेपर्स की मदद से तय किया कि अगला प्रयोग क्या होना चाहिए और क्लाउड लैब में रोबॉट्स ने 580 प्लेट्स पर 36,000 से ज्यादा प्रयोग करके इसे पूरा किया।
आम आदमी को क्या फायदा होगा?
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दवाइयों की कीमत में गिरावट: इंसुलिन, कैंसर और अन्य बायोलॉजिकल दवाइयां सस्ती होंगी, जिससे इलाज आम लोगों की पहुंच में आएगा।
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मेडिकल टेस्ट सस्ते और आसान: डायग्नोस्टिक किट्स में सस्ता प्रोटीन इस्तेमाल होने से जांच की लागत घटेगी, जिससे छोटे शहरों और गांवों तक टेस्ट आसानी से पहुंचेंगे।
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इंडस्ट्री और पर्यावरण पर असर: कई फैक्ट्रियां अब केमिकल्स की जगह सस्ते एंजाइम का इस्तेमाल करेंगी, जिससे प्रदूषण कम होगा।
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रिसर्च की गति बढ़ेगी: महंगे प्रयोगों की बाधा कम होने से वैज्ञानिक ज्यादा नए आइडिया आजमा पाएंगे, जिसका सीधा फायदा समाज को नई दवाओं, बेहतर इलाज और सस्ते उत्पादों के रूप में मिलेगा।
GPT-5 की यह खोज भविष्य की स्वास्थ्य और कृषि तकनीक में क्रांति ला सकती है।
