
ढाका: बांग्लादेश में आम चुनाव से सिर्फ कुछ घंटे पहले जमात-ए-इस्लामी ने अपने भारत और अल्पसंख्यकों के प्रति रुख में बदलाव का संकेत दिया है। पार्टी प्रमुख डॉ. शफीकुर रहमान ने कहा है कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो वह भारत के साथ मजबूत, सम्मानजनक और पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंध स्थापित करने के लिए काम करेगी।
ढाका में संवाददाताओं से बातचीत में शफीकुर रहमान ने राष्ट्रीय एकता, समान नागरिकता और पड़ोसी देशों के साथ रचनात्मक संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “हम संघर्ष नहीं चाहते, हमारा उद्देश्य विकास और शांति के लिए साझेदारी बनाना है। इसके लिए आपसी सम्मान और विश्वास जरूरी हैं। भारत हमारा निकटतम पड़ोसी है और हमारी प्राथमिकता रहेगा।”
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का भरोसा
जमात प्रमुख ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर आशंकाओं को दूर किया। उन्होंने स्पष्ट किया, “उनका धर्म कोई भी हो, वे सभी बांग्लादेशी नागरिक हैं। मेरे देश में कोई भी दूसरे दर्जे का नागरिक नहीं है। हम किसी को भी अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक के आधार पर अलग नहीं मानते।”
समावेशी विकास पर जोर
शफीकुर रहमान ने यह भी कहा कि देश की प्रगति वास्तविक समावेशन पर निर्भर करती है। उन्होंने समझाया, “समावेशन का मतलब लोगों को विभाजित करना नहीं है। इसका अर्थ है कि हम सबसे पहले बांग्लादेशी हैं और सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलना चाहिए।”
बता दें कि 2024 के हिंसक आंदोलन के बाद यह बांग्लादेश में पहला आम चुनाव है। जमात-ए-इस्लामी, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेतृत्व वाले गठबंधन की मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभर रही है।
