Thursday, February 12

गुवाहाटी। असम में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी हो गई है और राज्य की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई है। असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनुराग गोयल ने जानकारी दी कि यह प्रक्रिया 10 फरवरी को समाप्त हुई, जो नवंबर से राज्य के सभी 35 जिलों में चल रही थी। इस विशेष अभियान के तहत बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने घर-घर जाकर सत्यापन किया, ताकि मतदाता सूची को त्रुटिरहित और पारदर्शी बनाया जा सके। 5.86 लाख नए नाम जुड़े, 2.43 लाख नाम हटाए गए मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार सत्यापन अभियान में लगभग 6.27 लाख ऐसे युवाओं की पहचान हुई जिनकी उम्र 18 वर्ष हो चुकी है या होने वाली है। इसके अलावा अंतिम सूची में: 5.86 लाख नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए 2.43 लाख नाम मसौदा सूची से हटाए गए उन्होंने बताया कि यह हटाए गए नाम कुल मसौदा सूची का लगभग 0.97 प्रतिशत हैं। 35 में से 24 जिलों में मतदाता संख्या घटी निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध जिलेवार आंकड़ों के अनुसार, असम के 35 जिलों में से 24 जिलों में अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई, जबकि 11 जिलों में मतदाता संख्या बढ़ी है। आंकड़ों में यह बदलाव कुछ सौ से लेकर 30 हजार से अधिक तक दर्ज किया गया। आदिवासी और पहाड़ी जिलों में बड़ी गिरावट रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के तीन पहाड़ी जिलों और बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र (BTR) के अंतर्गत आने वाले पांच जिलों में मतदाता संख्या में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई। इसके साथ ही कामरूप और कामरूप (मेट्रोपॉलिटन) जिलों में भी वोटरों की संख्या कम हुई है, जहां राज्य की राजधानी गुवाहाटी स्थित है। मुस्लिम बहुल जिलों में वोटर बढ़े सबसे अहम बात यह सामने आई है कि असम के अधिकांश मुस्लिम बहुल जिलों में मसौदा सूची की तुलना में अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, बहुसंख्यक आदिवासी जनसंख्या वाले जिलों में वोटरों की संख्या घटने से इस प्रक्रिया को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। निर्वाचन अधिकारी बोले—विशेष पुनरीक्षण में गिरावट सामान्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनुराग गोयल ने कहा कि अधिकारियों ने पूरी सतर्कता के साथ मतदाता सूची को अपडेट किया है और यह सुनिश्चित किया गया कि सूची अधिकतम त्रुटिरहित हो। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में भी जब विशेष पुनरीक्षण होता है, तो आमतौर पर मतदाता संख्या में गिरावट देखने को मिलती है, क्योंकि मृत, स्थानांतरित या फर्जी नाम हटाए जाते हैं। जनता से अपील—मतदाता सूची में नाम जरूर जांचें मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राज्य की जनता से अपील की है कि अंतिम सूची प्रकाशित हो चुकी है, इसलिए हर नागरिक को अपना नाम दोबारा जांच लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोग: Voter Helpline App voters.eci.gov.in पोर्टल या अपने BLO से संपर्क कर सूची में अपना नाम सत्यापित कर सकते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी कारणवश किसी मतदाता का नाम सूची में नहीं है, तो अपडेट की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और नामांकन की अंतिम तिथि तक सूची में सुधार जारी रहेगा।

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया है। भाजपा नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर तीखा हमला बोलते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि यदि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा सत्ता में आती है, तो राज्यभर से मुगल शासकों से जुड़े नाम और निशान हटाए जाएंगे।

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सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल में बंगाल में बाबर जैसे “विदेशी हमलावरों” के नाम सार्वजनिक स्थानों पर बने रहेंगे, लेकिन भाजपा सरकार बनने पर ऐसा नहीं होने दिया जाएगा।

‘अप्रैल तक इंतजार कीजिए, फिर देखिए क्या होता है’

भाजपा नेता ने आक्रामक तेवर दिखाते हुए कहा कि आने वाले चुनावों में भाजपा सरकार बनाएगी और उसके बाद बंगाल में मुगल शासकों से जुड़े नामों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा—
“अप्रैल तक इंतजार करें, जब हम सरकार बनाएंगे तो देखेंगे क्या होता है।”

बाबर को बताया विदेशी हमलावर

सुवेंदु अधिकारी ने बाबर को विदेशी हमलावर बताते हुए कहा कि बाबर, हुमायूं, अकबर, शाहजहां और औरंगजेब जैसे मुगल शासक भारत में अत्याचार और जबरन धर्म परिवर्तन के लिए जिम्मेदार रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुगल शासन के दौरान मंदिरों को तोड़ा गया और महिलाओं के खिलाफ हिंसा हुई।

‘दार्जिलिंग से दीघा तक नाम हटाएंगे’

उन्होंने दावा किया कि बंगाल में जहां-जहां मुगल शासकों के नाम सार्वजनिक स्थलों पर दर्ज हैं, भाजपा सरकार बनने पर उन्हें समाप्त कर दिया जाएगा। सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि
“दार्जिलिंग से दीघा तक और कूच बिहार से काकद्वीप तक, जहां भी उनके नाम लिखे हैं, भाजपा सरकार उन्हें खत्म करेगी।”

बाबरी मस्जिद मुद्दे से बंगाल की राजनीति गरमाई

गौरतलब है कि बाबरी मस्जिद का मुद्दा बंगाल में अब बड़ा राजनीतिक विवाद बनता जा रहा है। इससे पहले टीएमसी के पूर्व नेता हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद जिले में ‘बाबरी मस्जिद’ बनाने की योजना का ऐलान किया था, जिसके बाद भारी विवाद खड़ा हो गया।

टीएमसी ने इस बयान के बाद हुमायूं कबीर को पार्टी से निलंबित कर दिया था। इसके बाद उन्होंने अपनी नई पार्टी जनता उन्नयन पार्टी (JUP) बनाने की घोषणा की।

राजनीतिक हलकों में बयान पर हलचल

सुवेंदु अधिकारी के बयान के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जहां भाजपा समर्थक इसे “इतिहास के पुनर्मूल्यांकन” से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं टीएमसी और विपक्ष इसे ध्रुवीकरण की राजनीति करार दे रहे हैं।

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