
कोलकाता। चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के दौरान दक्षिण कोलकाता के दो प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों भवानीपुर और बालीगंज में सामने आई ‘तार्किक विसंगतियों’ (Logical Discrepancies) ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। एक अध्ययन में दावा किया गया है कि इन क्षेत्रों में विसंगति के आधार पर चिह्नित मतदाताओं में मुस्लिम समुदाय के वोटरों की संख्या असमान रूप से अधिक पाई गई है।
यह अध्ययन सबार इंस्टीट्यूट द्वारा किया गया है, जिसमें SIR प्रक्रिया के दौरान चिह्नित मतदाताओं के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।
भवानीपुर में 15 हजार से अधिक मतदाताओं में आधे से ज्यादा मुस्लिम
अध्ययन के अनुसार, भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में तार्किक विसंगति के तहत चिह्नित कुल 15,145 मतदाताओं में से 7,846 मतदाता मुस्लिम हैं। यानी यह अनुपात करीब 52% तक पहुंच गया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भवानीपुर में अन्य श्रेणियों, जैसे ‘अनुपस्थित, स्थानांतरित या मृत/डुप्लिकेट’ (ASD) में मुस्लिम मतदाताओं का अनुपात केवल 22.7% है, जबकि ‘अनमैप्ड’ मतदाताओं में यह करीब 26% है। यह आंकड़ा 2011 की जनगणना के अनुसार भवानीपुर में मुस्लिम आबादी के लगभग 20% हिस्से के आसपास माना जाता है।
लेकिन ‘Logical Discrepancies’ श्रेणी में यह हिस्सा अचानक बढ़कर 52% हो जाना सवाल खड़े कर रहा है।
बालीगंज में स्थिति और भी चौंकाने वाली—78% तक मुस्लिम
दूसरी ओर, दक्षिण कोलकाता के पॉश आवासीय क्षेत्र बालीगंज में विसंगति के तहत चिह्नित मतदाताओं की संख्या और भी अधिक बताई गई है। अध्ययन में दावा है कि बालीगंज में कुल 30,008 मतदाताओं में से 23,256 मतदाता अल्पसंख्यक समुदाय से हैं, जो लगभग 78% है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बालीगंज में ASD मतदाताओं में मुस्लिम अनुपात लगभग 44% और अनमैप्ड मतदाताओं में 42% है, जो क्षेत्र में अनुमानित 50% मुस्लिम आबादी के करीब है। लेकिन तार्किक विसंगति श्रेणी में यह संख्या अचानक 78% तक पहुंचना गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
चुनाव आयोग ने आरोपों को किया खारिज
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने इन दावों को लेकर उठ रहे सवालों को सिरे से खारिज किया है। आयोग के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में धर्म का कोई रिकॉर्ड नहीं होता और न ही आयोग धर्म के आधार पर कोई डेटा रखता है। इसलिए किसी समुदाय विशेष को टारगेट करने के आरोपों को गलत बताया गया है।
टीएमसी का आरोप—अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा
इस रिपोर्ट के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि भाजपा मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया का इस्तेमाल मुस्लिम बहुल इलाकों को निशाना बनाने के लिए कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषक उदययन बंद्योपाध्याय ने भी दावा किया कि SIR के लिए इस्तेमाल किया गया एआई आधारित प्रोग्राम अल्पसंख्यक मतदाताओं, विशेषकर महिलाओं को परेशान करने के लिए बनाया गया हो सकता है।
भाजपा का पलटवार—अवैध प्रवासियों की एंट्री का मुद्दा
वहीं बंगाल भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि इस मुद्दे का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची में अवैध प्रवासियों के नाम जोड़े जाने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं और संशोधन उसी संदर्भ में किया जा रहा है।
ऑडिट की मांग तेज, नए विवाद की शुरुआत
इन आंकड़ों के सामने आने के बाद कोलकाता में SIR प्रक्रिया को लेकर विवाद और गहरा गया है। कई सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से मांग की जा रही है कि सॉफ्टवेयर आधारित ‘Logical Discrepancy Filter’ का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया किसी एक समुदाय को असमान रूप से प्रभावित न करे।
अब यह मामला सिर्फ मतदाता सूची संशोधन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पारदर्शिता, तकनीक के इस्तेमाल और निष्पक्षता जैसे सवालों पर भी राजनीतिक संघर्ष का नया केंद्र बनता नजर आ रहा है।
