
पटना। पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ (PUSU) चुनाव-2026 को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। 28 फरवरी को होने वाले चुनाव के लिए अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है। इस बार लगभग 20,000 छात्र-छात्राएं अपने मताधिकार का प्रयोग कर छात्रसंघ की नई टीम का चयन करेंगे। चुनाव को निष्पक्ष और अनुशासित बनाने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय ने आचार संहिता लागू कर दी है और कई नए सख्त नियम भी लागू किए गए हैं।
पटना विश्वविद्यालय के मुख्य चुनाव अधिकारी शंकर कुमार ने बताया कि छात्रों की सुविधा के लिए मतदाता सूची विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड की जाएगी। मतदाता सूची का मसौदा 6 फरवरी को जारी किया गया था, जिसके बाद 7 से 9 फरवरी के बीच सुधार संबंधी आवेदन लिए गए।
11 फरवरी से नामांकन पत्र बिक्री शुरू
चुनाव प्रक्रिया के तहत नामांकन पत्रों की बिक्री 11 फरवरी सुबह 10 बजे से शुरू हो चुकी है, जो 14 फरवरी दोपहर 3 बजे तक जारी रहेगी। नामांकन पत्र की कीमत 50 रुपये रखी गई है। उम्मीदवारों को नामांकन पत्र के साथ चुनाव आचार संहिता और दिशा-निर्देशों से संबंधित 16 पृष्ठों की पुस्तिका भी दी जाएगी।
इसी अवधि में उम्मीदवार परीक्षा नियंत्रक कार्यालय से ‘शैक्षणिक वर्ष न होने का प्रमाण पत्र’ भी प्राप्त कर सकेंगे।
पांच प्रमुख पदों के लिए होगा चुनाव
इस बार छात्रसंघ चुनाव में पांच केंद्रीय पदों पर चुनाव कराया जाएगा। इनमें—
-
अध्यक्ष
-
उपाध्यक्ष
-
महासचिव
-
संयुक्त सचिव
-
कोषाध्यक्ष
इसके अलावा विभिन्न कॉलेजों और घटक इकाइयों से 24 पार्षदों का भी चुनाव किया जाएगा।
एक हजार छात्रों पर एक पार्षद का नियम
चुनाव अधिकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय में हर 1000 छात्रों पर एक पार्षद चुने जाने की व्यवस्था लागू रहेगी। कॉलेजों और इकाइयों के अनुसार पार्षदों का वितरण तय कर दिया गया है।
चुनाव प्रचार में बड़े बदलाव, मुद्रित पोस्टर पर रोक
इस बार चुनाव प्रचार को लेकर प्रशासन ने बेहद सख्त निर्देश जारी किए हैं। लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुरूप विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी उम्मीदवार को प्रचार में—
-
मुद्रित पोस्टर
-
मुद्रित पर्चे
-
अन्य मुद्रित प्रचार सामग्री
का प्रयोग करने की अनुमति नहीं होगी। उम्मीदवार केवल हस्तनिर्मित पोस्टर और फोटोकॉपी का उपयोग कर सकेंगे।
लाउडस्पीकर, वाहन और जानवरों पर पूर्ण प्रतिबंध
चुनाव को शांतिपूर्ण और अनुशासित बनाए रखने के लिए इस बार प्रचार के दौरान—
-
लाउडस्पीकर का उपयोग
-
वाहनों का इस्तेमाल
-
जानवरों का प्रयोग
-
फिजूलखर्ची
-
बड़ी रैलियां और शो ऑफ
पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है।
बिना अनुमति नहीं निकलेगा जुलूस
विश्वविद्यालय प्रशासन ने निर्देश दिया है कि किसी भी उम्मीदवार या समर्थक को प्रोक्टर या संबंधित प्रिंसिपल की लिखित अनुमति के बिना कोई जुलूस या सार्वजनिक सभा आयोजित करने की इजाजत नहीं होगी।
राजनीतिक दलों की प्रत्यक्ष भागीदारी पर रोक
चुनाव को ‘कैंपस-केंद्रित’ बनाए रखने के लिए यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी राजनीतिक दल की प्रत्यक्ष भागीदारी चुनाव में नहीं होगी। हालांकि छात्र राजनीतिक संगठन सक्रिय रहेंगे, लेकिन चुनाव प्रचार में बड़े बजट और राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन पर रोक लगाई गई है।
खर्च का हिसाब देना होगा अनिवार्य
प्रचार के दौरान उम्मीदवारों को खर्च का पूरा विवरण रखना अनिवार्य होगा। निर्धारित अवधि के भीतर सभी खर्चों का लेखा-जोखा चुनाव पर्यवेक्षकों के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। उम्मीदवार केवल छात्र समुदाय से मिले स्वैच्छिक योगदान का ही उपयोग कर सकेंगे, किसी बाहरी स्रोत से धन लेने की अनुमति नहीं होगी।
पहचान पत्र साथ रखना जरूरी
चुनाव प्रचार के दौरान उम्मीदवारों और उनके समर्थकों को संस्था या चुनाव कार्यालय द्वारा जारी प्रमाणित पहचान पत्र हमेशा साथ रखना अनिवार्य होगा।
आचार संहिता लागू, पुरानी छात्रसंघ इकाई भंग
पटना विश्वविद्यालय की कार्यवाहक कुलपति एवं पीयूएसयू की मुख्य संरक्षक प्रो. नमिता सिंह द्वारा चुनाव कार्यक्रम घोषित किए जाने के साथ ही आचार संहिता प्रभावी हो गई है। इसके साथ ही पूर्व छात्रसंघ को भंग कर दिया गया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि समय से पहले चुनाव कराने का उद्देश्य भविष्य में नियमित रूप से चुनाव कराए जाने की मजबूत व्यवस्था तैयार करना है।
कांटे की टक्कर की उम्मीद
पिछले छात्रसंघ चुनाव में केंद्रीय पैनल की पांच सीटों में से तीन सीटों पर महिला उम्मीदवारों की जीत हुई थी। इस बार भी चुनाव को लेकर कैंपस में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना जताई जा रही है।
