
अहमदाबाद: सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कार्यवाहक डीजीपी नियुक्ति की प्रथा पर नाराजगी जताई और राज्यों को नियमित डीजीपी नियुक्त करने के लिए समय पर प्रस्ताव भेजने का आदेश दिया। इस कड़े रुख के बाद गुजरात की ब्यूरोक्रेसी में चर्चा तेज हो गई है कि डॉ. के एल एन राव को जल्द ही रेगुलर डीजीपी बनाया जा सकता है।
अभी की स्थिति
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गुजरात में विकास सहाय के सेवानिवृत्त होने के बाद डॉ. के एल एन राव को इंचार्ज डीजीपी बनाया गया।
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वे वर्तमान में डीजीपी के साथ-साथ सीआईडी क्राइम, रेलवे और जेल प्रशासन के कार्यभार भी संभाल रहे हैं।
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राज्य में सबसे सीनियर आईपीएस डॉ. शमशेर सिंह भी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उनका 31 मार्च को रिटायर होना तय है।
सुप्रीम कोर्ट का असर
तेलंगाना मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कार्यवाहक डीजीपी पर कड़ी चेतावनी दी थी। कोर्ट ने राज्यों को समय पर रेगुलर डीजीपी चयन के प्रस्ताव भेजने और देरी होने पर सीधे अदालत में जाने का निर्देश दिया। गुजरात में भी इसी आदेश के असर से अब डॉ. के एल एन राव को अप्रैल में रेगुलर डीजीपी बनाए जाने की चर्चा शुरू हो गई है।
संभावित बदलाव
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डॉ. शमशेर सिंह के रिटायर होने के बाद, के एल एन राव के कार्यभार को हल्का किया जा सकता है।
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डीजीपी सीआईडी क्राइम और रेलवे, तथा जेल प्रशासन की जिम्मेदारी किसी अन्य डीजीपी रैंक के अधिकारी को सौंपी जा सकती है।
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इससे डॉ. के एल एन राव पूरी तरह राज्य के डीजीपी के रूप में कार्य करेंगे।
जानकारों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद गुजरात सरकार जल्द ही स्पष्ट निर्णय ले सकती है और यह नियुक्ति अप्रैल से प्रभावी हो सकती है।
